संसद के चालू मॉनसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को भी दोनों सदनों की कार्यवाही जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गई. लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 फिर दो और बाद में दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही पहले 12, फिर 2, फिर 3 और फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कविता पढ़कर विरोध जाहिर किया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भड़क गए.
दरअसल, शाम तीन बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही चौथी बार शुरू हुई, चेयर से उपसभापति हरिवंश ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बोलने को कहा. बोलने खड़े हुए खड़गे ने हाथों में एक पन्ना लिया हुआ था. उन्होंने कविता पढ़ना शुरू किया, "सच को जिंदा रखने के लिए मर जाएंगे. ये दिल ये जान सब कुर्बान कर जाएंगे. मगर देश से अन्याय मिटाने के लिए हर चुनौती से टकरा जाएंगे. तुम्हारा तो सिर्फ वक्त है..."
मल्लिकार्जुन खड़गे अभी आगे बोल ही रहे थे, कि उपसभापति हरिवंश ने उनको रोकते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का नाम ले लिया. संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने कहा कि खड़गे ऐसे ही करते रहते हैं. विषय पर चर्चा शुरू करने के लिए फॉर्मल डिस्कशन पर बात कर रहे हैं, वो लिखकर ले के फिर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे तो नहीं चल सकता.
इस पर चेयर से उपसभापति हरिवंश ने कहा कि मैंने सदन चलाने के लिए ही प्रस्ताव पर बोलने का आग्रह किया. उपसभापति ने इसके बाद सदन की कार्यवाही 24 जुलाई, शुक्रवार को दिन में 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की. वहीं, लोकसभा में बार-बार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी.
नहीं चल सकी लोकसभा
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने दो टूक कहा कि प्रश्नकाल के दौरान प्रश्नकाल ही चलेगा. स्पीकर की दो टूक के बावजूद विपक्षी सदस्य वेल में जमे रहे, नारेबाजी करते रहे. स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष का हंगामा जारी रहा. हंगामे के बीच ही सदन में लिस्टेड बिजनेस लिए गए और कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
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दो बजे चेयर पर आए डिप्टी स्पीकर पैनल के दिलीप सैकिया ने नियम 377 के तहत चर्चा शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका. चेयर से बार-बार अपील के बावजूद विपक्षी सदस्य वेल में डटे रहे. अंत में दिलीप सैकिया ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
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