DPDP एक्ट से पत्रकारों को रखें बाहर, NBDA ने अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र

NBDA ने DPDP एक्ट, 2023 से पत्रकारों को छूट देने की मांग करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है. एसोसिएशन का कहना है कि इस कानून के कारण खबरों की जांच, गोपनीय सूत्रों की पहचान और पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है.

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NBDA ने DPDP एक्ट से पत्रकारों को छूट देने की मांग को लेकर अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा.(Photo-ITG) NBDA ने DPDP एक्ट से पत्रकारों को छूट देने की मांग को लेकर अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा.(Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:05 PM IST

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के तहत पत्रकारिता से जुड़े कामों को स्पष्ट छूट देने की मांग की है. इस संबंध में एसोसिएशन ने 2 नवंबर 2026 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है. NBDA ने उनसे जल्द बैठक करने की मांग भी की है, ताकि इस मुद्दे पर चर्चा कर कानून में जरूरी संशोधन किया जा सके.

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पत्र में NBDA ने कहा कि सरकार ने भरोसा दिया है कि पत्रकारिता की आजादी पर रोक लगाने का उसका कोई इरादा नहीं है. एसोसिएशन ने इस भरोसे का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसे कानून में भी साफ तौर पर शामिल किया जाना चाहिए. उसका कहना है कि मौजूदा कानून में पत्रकारिता को अलग से छूट नहीं दी गई है. इससे न्यूज चैनलों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को खबरों की जांच और रिपोर्टिंग में परेशानी हो सकती है.

NBDA ने कहा कि भ्रष्टाचार या पैसों की गड़बड़ी से जुड़े मामलों की खबर करते समय अगर पत्रकारों को संबंधित व्यक्ति से पहले अनुमति लेनी पड़ेगी, तो जांच की जानकारी उसे मिल सकती है. इससे वह सबूत मिटा सकता है या जांच में रुकावट डाल सकता है. एसोसिएशन ने कहा कि खबर छापने से पहले किसी व्यक्ति का पक्ष लेना जरूरी है, लेकिन उससे खबर की जांच या रिपोर्टिंग की अनुमति लेना अलग बात है.पत्र में यह भी कहा गया कि किसी खबर को हटाने या उससे जुड़ा डेटा मिटाने की मांग की जा सकती है. ऐसे में पत्रकारों के लिए पुरानी खबरों, रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है. इन चीजों की जरूरत आगे खबर की जांच करने, गलती सुधारने और कानूनी मामलों में अपना पक्ष रखने के लिए होती है.

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गोपनीय सूत्रों की पहचान सामने आने का डर

NBDA के चेयरमैन रजत शर्मा ने पत्र में कहा है कि नए कानून के तहत जानकारी मांगने पर पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की पहचान सामने आ सकती है. इससे उन लोगों को डर लगेगा, जो किसी मामले की जानकारी पत्रकारों तक पहुंचाते हैं. एसोसिएशन ने यह भी चिंता जताई कि शिकायतों, कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माने के डर से पत्रकार जरूरी मुद्दों पर खबरें करने से बच सकते हैं.NBDA ने सरकार से मांग की है कि कानून में बदलाव कर पत्रकारिता को साफ और पूरी छूट दी जाए. जब तक कानून में बदलाव नहीं होता, तब तक सरकार इस बारे में लिखित जानकारी दे कि पत्रकारों को क्या सुरक्षा मिलेगी. एसोसिएशन ने अश्विनी वैष्णव से जल्द बैठक करने और इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा में उसे शामिल करने का भी अनुरोध किया है. 

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