मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता एन बीरेन सिंह ने कहा है कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की बीजेपी सरकार को लोगों का खोया हुआ भरोसा वापस जीतना होगा. उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर साजिश रचकर उन्हें हटाने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि लोग उन्हें फिर मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. इसके बावजूद उन्होंने बीजेपी की वापसी का समर्थन किया.
बीरेन सिंह ने कहा, "मुझे 2017 से ठीक से नहीं देखा गया. मैं दिल्ली नेतृत्व पर आरोप नहीं लगा रहा, लेकिन राज्य के कुछ नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर मेरे खिलाफ साजिश की." उनके मुताबिक कुछ विधायक यह बात कभी मान नहीं पाए कि कांग्रेस से आने के बाद वे दो बार मुख्यमंत्री बने. ऐसे लोग बीजेपी को अपनी जागीर समझते हैं.
सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया था. उस समय पार्टी में नाराजगी बढ़ रही थी और कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दे रही थी. मौजूदा मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह तब उनकी कैबिनेट में मंत्री थे. खबरों के मुताबिक उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को चेताया था कि बीरेन सिंह को नहीं हटाया गया तो सरकार गिर सकती है. बीरेन सिंह ने पहली बार इस अंदरूनी खींचतान पर बात की है.
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ध्रुवीकरण का जिम्मेदार ठहराए जाने पर उन्होंने पूछा कि फरवरी 2025 में हटने के बाद भी हिंसा क्यों जारी रही और दूसरे समुदायों तक क्यों फैली. उन्होंने नगा और कुकी समुदायों के बीच चल रही हिंसा का जिक्र किया. उनके शब्दों में, पहले मुझ पर बहुसंख्यकों का साथ देने का आरोप लगता था, अब ईसाई बनाम ईसाई है, यूरोपियन यूनियन कहां गया. जुलाई 2023 में यूरोपीय संसद ने मणिपुर हिंसा पर चिंता जताई थी.
उन्हें डर है कि जनता का भरोसा घट रहा है. नशे और अफीम की खेती के खिलाफ अभियान नहीं दिख रहा, और संदिग्ध घुसपैठियों की बायोमेट्रिक पहचान भी जारी रखनी चाहिए. मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर बोले कि जनता की मांग तेज है, पर फैसला बहुमत पर निर्भर है. उन्हें अफसोस है कि फूट और खींचतान से काम अधूरा रह गया. वे 65 साल के हैं.
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