केरलम की 15 महीने की हथिनी माया को बेहतर इलाज के लिए कोच्चि से गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा एयरलिफ्ट किया जा रहा है. वन विभाग की ओर से कई महीनों तक इलाज किए जाने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उसे लंबे समय तक गहन चिकित्सा सुविधा देने के लिए वंतारा शिफ्ट करने का फैसला लिया गया.
माया को जन्म के दिन ही उसके झुंड ने छोड़ दिया था. इसके बाद उसे केरलम के कप्रीक्कड स्थित अभयारण्यम कैंप लाया गया. यहां वन विभाग के अधिकारियों और देखभाल करने वालों ने उसकी जिम्मेदारी संभाली. तब से कैंप के कर्मचारी लगातार उसकी देखभाल कर रहे हैं.
जुलाई 2026 में माया एक हादसे में गिर गई थी. इसके बाद वह अपने पैरों पर वजन नहीं उठा पा रही थी. करीब दो महीने तक वह खुद से खड़ी नहीं हो सकी. उसकी हालत को देखते हुए वन विभाग ने इलाज की निगरानी के लिए विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड बनाया.
मेडिकल बोर्ड की सलाह पर असिस्टेंट फॉरेस्ट वेटरनरी ऑफिसर ने अभयारण्यम के पशु चिकित्सालय में माया का इलाज किया. हालांकि, उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ. ऐसे में उसे लंबे समय तक गहन इलाज और विशेष देखभाल की जरूरत महसूस हुई.
हाथी का बच्चा लंबे समय तक खड़ा नहीं हो पाता है तो उसे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. लगातार लेटे रहने से शरीर पर दबाव पड़ता है. इससे घाव होने, मांसपेशियां कमजोर होने के साथ सांस लेने और पाचन से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं. 15 महीने की उम्र में माया को सही खानपान और लगातार देखभाल की भी जरूरत है.
वंतारा की टीम ने की माया की जांच
वन विभाग ने माया के इलाज के लिए विशेषज्ञ मदद लेने का फैसला किया. असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, अभयारण्यम के अनुरोध पर 24 अक्टूबर 2026 को उसकी चिकित्सकीय जांच की गई. इसके बाद वन विभाग ने हाथियों की देखभाल और पुनर्वास का अनुभव रखने वाले वंतारा से संपर्क किया. वंतारा की पशु चिकित्सकों की टीम कम समय के नोटिस पर अभयारण्यम पहुंची. वहां टीम ने वन विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ मिलकर माया की जांच की.
संयुक्त जांच के बाद दोनों टीमों ने माना कि माया को वंतारा की सुविधाओं में शिफ्ट करना उसके इलाज और ठीक होने की संभावना के लिए बेहतर होगा.
मेडिकल टीम भी एयरलिफ्ट के दौरान रहेगी साथ
माया को कोच्चि एयरपोर्ट से जामनगर स्थित वंतारा एयरलिफ्ट किया जा रहा है. वहां उसे गहन चिकित्सा सुविधा मिलेगी. इस यात्रा में मेडिकल बोर्ड के सदस्य और वन विभाग के अधिकारी भी उसके साथ रहेंगे. सफर के दौरान उसकी देखभाल के लिए दोनों टीमों ने मिलकर इंतजाम किए हैं.
माया को वंतारा शिफ्ट करने का फैसला केरलम वन विभाग और वंतारा के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है. इसका मकसद उसे विशेष चिकित्सा सुविधा और लगातार विशेषज्ञ देखभाल देना है, ताकि उसके ठीक होने की संभावना बेहतर हो सके.
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