एयरफोर्स डे: बालाकोट में आतंकियों पर बम बरसाने वाले वॉरियर्स को किया गया सम्मानित

वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने दो दर्जन से अधिक वायुवीरों का सम्मान किया. इसमें वो जवान भी शामिल रहे, जिन्होंने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयरस्ट्राइक की थी.

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वायुसेना दिवस पर वॉरियर्स को किया गया सम्मानित वायुसेना दिवस पर वॉरियर्स को किया गया सम्मानित

अभिषेक भल्ला

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 11:35 AM IST
  • एयरफोर्स डे पर जवानों का सम्मान
  • बालाकोट के वॉरियर्स हुए सम्मानित

वायुसेना दिवस के मौके पर गुरुवार को गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर जश्न मनाया गया. इस दौरान सेना की ओर से जवानों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने पराक्रम से देश की सेवा की. वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने दो दर्जन से अधिक वायुवीरों का सम्मान किया. इसमें वो जवान भी शामिल रहे, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट में हुई एयरस्ट्राइक में अहम रोल निभाया था.

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किन्हें किया गया सम्मानित?
बालाकोट एयरस्ट्राइक में शामिल होने वाले तीन हीरो को एयरफोर्स डे के मौके पर सम्मानित किया गया. इनमें स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल, जो कि फाइटर कंट्रोलर थीं शामिल रहीं. एयरस्ट्राइक के बाद जब पाकिस्तानी वायुसेना ने काउंटर अटैक करने की कोशिश की तो उन्होंने ही दुश्मन को जवाब दिया. विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान के प्लेन को जब हिट लगी तो उस वक्त मिंटी अग्रवाल ही पूरे ऑपरेशन में सभी पायलट को अपडेट दे रही थीं. 

उनके अलावा ग्रुप कैप्टन हंसल, ग्रुप कैप्टन हेमंत कुमार वडसेरा को भी वायुसेना प्रमुख ने सम्मानित किया. तीनों को युवा सेना मेडल से सम्मानित किया गया.

आपको बता दें कि युवा सेना मेडल उन जवानों को दिया जाता है, जो कि युद्ध के वक्त में अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं. सिर्फ युद्ध नहीं बल्कि तनाव और अन्य ऐसे अवसरों पर जब दुश्मन से सीधे सामना हो तब भी ये अवॉर्ड दिया जाता है. 

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गौरतलब है कि साल 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एक्शन लिया था. जिसमें आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया था और जैश के आतंकियों को ढेर किया गया था. इस दौरान पाकिस्तान ने भी भारत में अपने लड़ाकू विमान भेजे थे, लेकिन भारत ने उन्हें खदेड़ दिया था. इस दौरान अभिनंदन पाकिस्तान की ओर लैंड हुए थे, लेकिन 48 घंटे के भीतर वो वापस अपने वतन लौट आए थे.

 

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