भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने को लेकर जारी विवाद के बीच संसद की एक स्थायी समिति ने इस मुद्दे की विस्तृत समीक्षा करने का फैसला किया है. एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में सर्विस शुरू करने की मंजूरी मिलने में देरी को लेकर विवाद चल रहा है. इस बीच संसदीय समिति ने सैटेलाइट इंटरनेट को उन प्रमुख विषयों में शामिल किया है, जिनकी आने वाले दिनों में गहन समीक्षा की जाएगी.
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बताया कि समिति ने सैटेलाइट इंटरनेट के मुद्दे को विस्तृत चर्चा के लिए चुना है. समिति की बैठक के बाद दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हम आने वाले दिनों में अपनी बैठक में सैटेलाइट इंटरनेट के मुद्दे पर चर्चा करेंगे.'
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहती हैं तीन कंपनियां
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए एलन मस्क की स्टारलिंक के अलावा यूटेलसैट वनवेब (Eutelsat OneWeb) और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस (Jio Satellite Communications) ने भी आवेदन किया है.
जियो सैटकॉम, रिलायंस जियो की सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी कंपनी है. वहीं, यूटेलसैट वनवेब को भारती समूह का समर्थन प्राप्त है, जो देशभर में एयरटेल के जरिए मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराता है.
एलन मस्क ने मुकेश अंबानी पर साधा था निशाना
पिछले हफ्ते एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू होने में बाधा डाल रहे हैं. मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर भी निशाना साधा था.
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अंबानी को 'प्रधानमंत्री अंबानी' कहकर संबोधित किया और सवाल उठाया कि क्या भारत के फैसलों पर उनका प्रभाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी ज्यादा है.
मस्क ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कारोबारी समूह भारतीय उपभोक्ताओं पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं.
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सरकार ने मस्क के आरोपों को किया खारिज
हालांकि, केंद्रीय संचार मंत्रालय ने एलन मस्क के आरोपों को खारिज कर दिया है. मंत्रालय ने नियामक व्यवस्था या उसके क्रियान्वयन में भेदभाव और पक्षपात के आरोपों को निराधार और गलत धारणा पर आधारित बताया है. सरकार का कहना है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने वाली सभी कंपनियों को एक जैसी नियामक शर्तों का पालन करना होगा. इनमें सुरक्षा संबंधी मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम शामिल हैं.
सरकार के मुताबिक, स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस मंजूरी की प्रक्रिया में लगभग एक ही स्तर पर हैं. तीनों कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
तीनों कंपनियों को मिल चुका है लाइसेंस
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले सप्ताह बताया था कि तीनों कंपनियों को सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस मिल चुका है. उन्होंने कहा कि अमेजन के प्रोजेक्ट कुइपर (Project Kuiper) ने भी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई है. हालांकि, उसे भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा.
सिंधिया के मुताबिक, सरकार की ओर से राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था को अंतिम रूप दिए जाने और कंपनियों के सुरक्षा संबंधी नियमों को पूरा करने के बाद स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और दूरसंचार विभाग (DoT) सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने के करीब हैं.
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