हिमाचल के 'समोसा कांड' की पूरी कहानी, जिसने कांग्रेस सरकार में मचाई हलचल

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पूरे मामले को गलत प्रचार बताया है. सरकार ने ऐसी कोई जांच करने के आदेश नहीं दिए. नरेश चौहान ने कहा इस मामले से सरकार का कोई लेना देना नहीं है. सीआईडी विभाग अपने स्तर पर मामले की जांच कर रहा है. आखिर मुख्यमंत्री को परोसे जाने वाली रिफ्रेशमेंट किसको दी गई.

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हिमाचल के समोसा कांड की सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हो रही है. (File Photo Of CM sukhvinder singh sukhu) हिमाचल के समोसा कांड की सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हो रही है. (File Photo Of CM sukhvinder singh sukhu)

अमन भारद्वाज / असीम बस्सी

  • शिमला,
  • 08 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:46 PM IST

मौजूदा वक्त में भारत और अमेरिका दोनों जगह समोसे की चर्चा हो रही है. डोनाल्ड ट्रंप के जीतने के बाद समोसा कॉकस मजबूत हुआ है और हिंदुस्तान के अंदर हिमाचल प्रदेश में समोसा कांड हुआ है, जिससे सूबे की सरकार में हलचल मच गई है. समोसा कांड होने के बाद इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई. अब जांच की रिपोर्ट भी आ गई है, जिसमें सामने आया है कि मुख्यमंत्री के लिए समोसा और केक मंगवाया गया था लेकिन यह कर्मचारियों को सर्व कर दिया गया.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 21 अक्टूबर को CID ​​मुख्यालय पहुंचे थे. यहां पर उनके लिए तीन बॉक्सेज में समोसे और केक मंगवाए गए थे. लेकिन हुआ यूं कि ये फूड आइटम्स सीएम के पास पहुंचने के बजाय सुरक्षाकर्मियों को सर्व कर दिया गया. इसके बाद इस पूरे मामले पर सीआईडी जांच बैठाई गई.

CID ने अपनी रिपोर्ट में क्या बताया है?

सीआईडी ​​ने जांच किया है कि किसकी गलती से मुख्यमंत्री के लिए लाए गए समोसे और केक सीएम के स्टाफ को परोसे गए. जांच रिपोर्ट पर एक सीनियर अधिकारी ने लिखा- यह कृत्य 'सरकार और सीआईडी ​​विरोधी' है. 21 अक्टूबर को सीएम एक कार्यक्रम के लिए सीआईडी ​​मुख्यालय गए थे. सीएम की जगह गलती से समोसे और केक सीएम के स्टाफ को परोसे गए.

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जांच में पता चला है कि किस अधिकारी और कर्मचारी की गलती के कारण सीएम के लिए लाए गए खाद्य पदार्थ सीएम के स्टाफ को परोसे गए. दिलचस्प बात यह है कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने इस जांच रिपोर्ट पर नोटिंग में लिखा है कि जांच रिपोर्ट में नामित सभी लोगों ने 'सीआईडी ​​विरोधी और सरकार विरोधी' तरीके से काम किया है, जिसके कारण ये चीजें वीवीआईपी को नहीं दी जा सकीं. यह भी लिखा है कि इन लोगों ने अपने एजेंडे के अनुसार काम किया है.

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम को लेकर आईजी रैंक के अधिकारी ने एक सब इंस्पेक्टर को अपने कार्यालय में बुलाया और उसे शिमला के लक्कड़ बाजार स्थित होटल रेडिसन ब्लू से सीएम के लिए कुछ खाद्य सामग्री लाने के आदेश दिए. इसके बाद एक एएसआई और एचएचसी चालक को सामान लाने के लिए भेजा गया और वे होटल से समोसे और केक के तीन डिब्बे लेकर आए और ये सामान इंस्पेक्टर रैंक की एक महिला अधिकारी को दे दिया गया. 

इसके बाद इंस्पेक्टर पूजा ने यह सामान एक उच्च पदस्थ अधिकारी के कमरे में रखने को कहा, जिसके बाद इसे वहां से कहीं और रख दिया गया. इस दौरान इन तीनों डिब्बों को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया गया. जांच के दौरान अधिकारियों ने अपने बयान में कहा कि जब उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पर्यटन विभाग के कर्मचारियों से पूछा कि क्या इन डिब्बों में रखे फूड आइटम्स सीएम को परोसे जाने हैं, तो उन्हें जवाब मिला कि यह सीएम के मेन्यू में नहीं है.

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जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री के साथ आने वाले स्टाफ के लिए चाय, पान की व्यवस्था का जिम्मा एक एमटीओ और एचएएसआई को सौंपा गया था. महिला अधिकारी ने अपने बयान में बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इन तीन बॉक्सेज में रखे आइटम्स मुख्यमंत्री को परोसे जाने हैं. और उन तीनों बक्सों को बिना खोले ही एमटी सेक्शन को सौंप दिया गया. 

आईजी के एचएएसआई के बयान के मुताबिक, जो तीन बक्से खुले थे, उन्हें एक एसआई और एचएचसी लेकर आए थे और उन्होंने कहा था कि यह आइटम्स आईजी साहब के कार्यालय में बैठे डीएसपी और अन्य स्टाफ को परोसे जाने थी. उनके निर्देश पर डिब्बों में रखे आइटम्स आईजी के कमरे में बैठे 10-12 लोगों को चाय के साथ परोसे गए. 

इस पूरे समोसा कांड में सभी गवाहों के बयानों के आधार पर पाया गया कि होटल रेडिसन से लाए गए इन तीन बॉक्सेज के बारे में केवल एक एसआई रैंक के अधिकारी को ही जानकारी थी, जिसमें सीएम के लिए खाने का सामान था. इसके बावजूद, इन तीनों बॉक्सेज को इंस्पेक्टर पूजा ने कहीं और भेज दिया. इन डिब्बों को एसआई रैंक के अधिकारी की मौजूदगी में खोला गया और खाने का सामान सीएम के स्टाफ को परोसा गया. इंस्पेक्टर रैंक की महिला अधिकारी ने बिना किसी अधिकारी से पूछे इन सामानों को एमटी सेक्शन को सौंप दिया था.

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'यह CID ​​का आंतरिक मामला'

समोसा विवाद पर डीजी सीआईडी ​​संजीव रंजन ने कहा, मुख्यमंत्री हमारे एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे. जब कार्यक्रम खत्म हुआ तो अधिकारी बैठकर चाय पी रहे थे और किसी ने पूछा कि कुछ सामान लाया गया था, उसका क्या हुआ, पता करो. बस इतना ही था." 

उन्होंने आगे कहा कि यह पूरी तरह से CID ​​का आंतरिक मामला है. यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और इसका राजनीतिकरण किया गया. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन लोगों का इससे कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और कोई नोटिस भी जारी नहीं किया गया है.

 यह भी पढ़ें: हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के जलपान विवाद ने खड़ा किया राजनीतिक बवाल

'सरकार ने नहीं दिया जांच का आदेश'

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पूरे मामले को गलत प्रचार बताया है. सरकार ने ऐसी कोई जांच करने के आदेश नहीं दिए. नरेश चौहान ने कहा इस मामले से सरकार का कोई लेना देना नहीं है. सीआईडी विभाग अपने स्तर पर मामले की जांच कर रहा है. आखिर मुख्यमंत्री को परोसे जाने वाली रिफ्रेशमेंट किसको दी गई.

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नरेश चौहान ने बीजेपी पर पलटवार किया और कहा कि बीजेपी नेता बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है. लिहाजा इस मसले के जरिए गलत तरीके से कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है.

बीजेपी ने क्या कहा था?

बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा, "राज्य सरकार को सूबे के विकास की कोई चिंता नहीं है और उसकी एकमात्र चिंता 'मुख्यमंत्री का समोसा' है." उन्होंने कहा कि सुक्खू के लिए लाए गए समोसे से जुड़ी हालिया घटना ने विवाद को जन्म दिया है. उन्होंने कहा कि जांच में इस गलती को "सरकार विरोधी" कृत्य बताया गया, जो कि बहुत बड़ा शब्द है. 

बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह घटना हिमाचल प्रदेश के सियासी हलकों में चर्चा का मुद्दा बन गई है. वास्तव में मुख्यमंत्री जैसे VVIP से जुड़े कार्यक्रम में इस तरह की समन्वय समस्याओं के कारण सरकारी मशीनरी शर्मिंदा है. 

वहीं, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कमेटी समोसे पर नहीं, गलत व्यवहरा पर बनाई गई थी.

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