'हिंदुओं को खतरा बताने से पहले आईना तो देख लेते', हामिद अंसारी के बयान पर VHP-BJP का पलटवार

हामिद अंसारी के नेहरू के पुराने बयान के जिक्र पर सियासी विवाद बढ़ गया है. VHP और बीजेपी नेताओं ने उनके बयान पर सवाल उठाए हैं. वहीं अंसारी ने इसे एजी नूरानी की किताब में दर्ज नेहरू की पुरानी टिप्पणी के संदर्भ में रखा था.

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एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में हामिद अंसारी. (Photo: ITG) एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में हामिद अंसारी. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:10 PM IST

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का जिक्र किया था. इसी पर बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े नेताओं ने सवाल उठाए हैं. विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि बहुसंख्यक हिंदू समाज को भारत के लिए खतरा बताने से पहले अपने सार्वजनिक जीवन को भी देखना चाहिए.

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अंसारी ने अपने भाषण में नेहरू के हवाले से कहा था कि भारत के लिए खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है. उन्होंने साफ किया था कि वह यह बात एजी नूरानी की 2019 में आई किताब The RSS: A Menace to India में दर्ज संदर्भ के आधार पर रख रहे हैं. यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक पुरानी बैठक से जुड़ी बताई गई, जिसे तत्कालीन विदेश सचिव गुंडेविया के रिकॉर्ड से जोड़ा गया है.

इस बयान के बाद विरोध की आवाजें अलग-अलग जगहों से आईं. विनोद बंसल ने कहा कि देश ने अंसारी को पद, सम्मान और अवसर दिए. उन्होंने पूछा कि बहुसंख्यक हिंदू समाज को देश के लिए खतरा बताना किस आधार पर सही ठहराया जा सकता है. उनका कहना था कि असली चिंता उन कट्टर सोच वाले लोगों से है, जो समाज में बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक का फर्क बढ़ाते हैं.

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यह भी पढ़ें: 'भारत को कम्युनिज्म से नहीं, हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से खतरा...', हामिद अंसारी ने किया नेहरू के पुराने बयान का जिक्र

'मुस्लिम समाज के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश'

बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन ने भी अंसारी के बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इस पर माफी मांगी जानी चाहिए. उनका कहना था कि देश में मुसलमान शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि देश में शांति का माहौल है, इसलिए ऐसे बयानों से बचना चाहिए.

वहीं, मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि बंटवारे के बाद भारत ने खुद को धर्मनिरपेक्ष देश के तौर पर आगे बढ़ाया, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रहते हैं. उनके मुताबिक, समाज में दूरी पैदा करने की कोशिश करने वालों की राजनीति सफल नहीं होगी.

'हर तरह के आतंकवाद की निंदा हो'

बीजेपी नेता करुणासागर ने भी अंसारी के बयान पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि अगर मुद्दा कट्टरता का है तो वामपंथी उग्रवाद और इस्लामी आतंकवाद को लेकर भी उतनी ही स्पष्ट बात होनी चाहिए. उनके मुताबिक, किसी भी तरह के आतंकवाद या उग्रवाद की एक समान शब्दों में निंदा होनी चाहिए.

इसके अलावा, ऑल इंडिया इमाम संगठन से जुड़े उमेर अहमद इलियासी ने भी अंसारी के बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से समाज का माहौल बिगड़ सकता है. इलियासी ने कहा कि मुसलमानों को भड़काने वाली बातों को समुदाय गंभीरता से नहीं लेगा.

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अंसारी ने क्या कहा था?

जिस बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसमें अंसारी ने सीधे तौर पर इस कथन को अपना विचार बताने के बजाय नूरानी की किताब का संदर्भ दिया था. उन्होंने नूरानी के लेखन के जरिए नागरिक राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धार्मिक पहचान से जुड़े सवाल भी उठाए.

अंसारी ने कहा था कि हाल के वर्षों में ऐसी प्रवृत्तियां दिखाई दी हैं, जो नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित सोच पर सवाल उठाती हैं. उनके मुताबिक, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है. उन्होंने इन प्रवृत्तियों का राजनीतिक और कानूनी स्तर पर मुकाबला करने की बात कही.

इस तरह एक पुराने ऐतिहासिक संदर्भ के जरिए कही गई बात अब मौजूदा राजनीति का मुद्दा बन गई है. एक तरफ अंसारी के भाषण को लेकर सवाल उठ रहे हैं, दूसरी तरफ उनके समर्थक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उन्होंने नेहरू के पुराने कथन को नूरानी की किताब के संदर्भ में सामने रखा था.

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