Gen Alpha आंदोलन... बिना वर्दी के घर-घर पहुंच रही पुलिस, फतेहपुर में खोज रहे जंतर-मंतर कनेक्शन

Gen Alpha vs System: फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में पानी, पंखे और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर छात्रों के आंदोलन के बाद नया विवाद शुरू हो गया है. आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र अंकुर सोनकर ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के बाद पुलिस सिविल ड्रेस में घर पहुंचकर पूछताछ कर रही है. वहीं प्रशासन ने छात्रों की मांगों को सही मानते हुए स्कूल में सुधार कार्य शुरू कराया है, जबकि पुलिस ने आरोपों को निराधार बताया है.

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स्कूल परिसर में सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान (Photo- Screengrab) स्कूल परिसर में सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान (Photo- Screengrab)

नीतेश श्रीवास्तव

  • फतेहपुर ,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

Fatehpur News: 24 घंटे तक स्कूल के साथियों के साथ प्रदर्शन किया तो अधिकारी आए, हमारी मांगें मानी गईं, स्कूल में पंखे लगने लगे, शौचालय साफ होने लगे. लगा लगा कि हम लड़ाई जीत गए.लेकिन शाम होते-होते सब बदल गया. सिविल ड्रेस में लोग घर पहुंचने लगे. माता-पिता से पूछा जाने लगा कि बेटा कहां है, थाने आना पड़ेगा...

ये शब्द किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के नहीं, बल्कि फतेहपुर के किशनपुर कस्बे स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के कक्षा 12 के छात्र अंकुर सोनकर के हैं. वही अंकुर, जिसने अपने साथ पढ़ने वाले करीब 1800 छात्र-छात्राओं की ओर से स्कूल में पानी, बिजली, पंखे, साफ शौचालय और बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाई थी. जिस आंदोलन के बाद जिला प्रशासन ने छात्रों की मांगों को सही मानते हुए स्कूल में सुधार कार्य शुरू करा दिए, अब उसी आंदोलन के बाद पुलिस की पूछताछ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है.

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अंकुर सोनकर का आरोप है कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद से पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) के लोग सिविल ड्रेस में उनके और आंदोलन में शामिल दूसरे छात्रों के घर पहुंच रहे हैं. परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है और थाने आने के लिए कहा जा रहा है. दूसरी तरफ पुलिस इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रही है. ऐसे में पानी और पंखों की मांग से शुरू हुआ यह आंदोलन अब छात्रों के आरोप, पुलिस की सफाई और प्रशासन के बयान के बीच नई बहस का विषय बन गया है.

हमने सिर्फ अपने अधिकार की बात की थी

अंकुर सोनकर बताते हैं कि कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी झेल रहे थे. कई कमरों में पंखे नहीं थे, पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी, शौचालयों की हालत खराब थी और पर्याप्त बेंच भी उपलब्ध नहीं थीं. उनका कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. अंकुर कहते हैं, हमने किसी राजनीतिक मुद्दे पर आंदोलन नहीं किया था. हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि जिस स्कूल में हम पढ़ते हैं, वहां पढ़ाई लायक बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए. जब बार-बार शिकायत के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो सभी बच्चों ने मिलकर धरना देने का फैसला किया. उनके मुताबिक करीब 24 घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान डीआईओएस, मजिस्ट्रेट और अन्य प्रशासनिक अधिकारी स्कूल पहुंचे. छात्रों की मांगों को सुना गया और लिखित रूप में आश्वासन भी दिया गया. इसके बाद छात्रों ने धरना समाप्त कर दिया.

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जीत का अहसास ज्यादा देर नहीं रहा

अंकुर का दावा है कि धरना खत्म होने के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया. वह कहते हैं, हमें लगा था कि अब सब ठीक हो जाएगा. लेकिन शाम होते ही सिविल ड्रेस में लोग घर आने लगे. मेरे घर भी आए और दूसरे छात्रों के घर भी गए. परिवार वालों से पूछा गया कि अंकुर कहां है, भाई का नाम क्या है, पिता क्या करते हैं. फिर कहा गया कि थाने आना पड़ेगा. अंकुर सवाल उठाते हैं, अगर हमने कोई अपराध किया था तो उसी दिन हमारे खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी. लेकिन अगर हमने सिर्फ पानी और पंखे की मांग की थी, तो फिर घर-घर जाकर पूछताछ क्यों हो रही है?  उनका आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई से आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके परिवारों पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.

पहले भी आवाज उठाई थी, तब भी धमकी मिली थी

अंकुर का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब छात्रों ने अपनी समस्याओं को उठाया हो. उनके मुताबिक पिछले साल भी उन्होंने पानी, बिजली और पंखों की व्यवस्था को लेकर आवाज उठाई थी. उस समय कथित तौर पर छात्रों को रस्टिकेट करने की धमकी दी गई थी. वह कहते हैं, हमारी बात सुनने के बजाय हमें चुप कराने की कोशिश की गई. लेकिन इस बार सभी बच्चे एक साथ खड़े हो गए, इसलिए प्रशासन को भी हमारी बात सुननी पड़ी.

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दिल्ली गया था, लेकिन आंदोलन वहीं से सीखकर नहीं आया

पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब प्रशासन की ओर से कहा गया कि कुछ छात्रों के पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल रहने की जानकारी सामने आई है. हालांकि प्रशासन ने यह भी कहा कि इस जानकारी की पुष्टि अभी की जा रही है. इस पर अंकुर सोनकर का कहना है कि वह निजी काम से दिल्ली गए थे और उसी दौरान जंतर-मंतर भी देखने चले गए थे. अंकूर का कहना है कि  दिल्ली जाना कोई अपराध नहीं है. वहां घूमने गया था. अब उसी बात को इस आंदोलन से जोड़कर पेश किया जा रहा है. हमारे स्कूल की समस्याएं यहीं की थीं. पानी नहीं था, पंखे नहीं थे, शौचालय गंदे थे. इसके लिए हमें किसी से आंदोलन सीखने की जरूरत नहीं थी. यह पूरे स्कूल के बच्चों की सामूहिक मांग थी.

प्रशासन बोला- बच्चों की मांग सही थी, इसलिए तुरंत शुरू कराया काम

डीएम के मुताबिक, जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस), मजिस्ट्रेट और स्थानीय प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की. जांच में छात्रों की कई मांगें जायज पाई गईं. इसके बाद स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि सभी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएं. उन्होंने बताया कि अगले ही दिन दोबारा टीम स्कूल भेजी गई. शौचालयों की सफाई का काम पूरा कराया गया, खेल मैदान की सफाई शुरू हुई, जिन कमरों में पंखे नहीं थे वहां नए पंखे लगाए जाने लगे और आरओ सिस्टम की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई. प्रशासन ने यह भी साफ किया कि जिले के अन्य स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि छात्र मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कोई जायज मांग रखते हैं तो उसका समय रहते समाधान किया जाए.

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पुलिस पर लगे आरोपों पर क्या बोली डीएम

जब जिलाधिकारी से पूछा गया कि आंदोलन के बाद छात्रों ने पुलिस द्वारा घर जाकर पूछताछ और दबाव बनाने का आरोप लगाया है, तो उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी छात्र को परेशान करना नहीं है. डीएम के अनुसार, पुलिस और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी है, ताकि कोई असामाजिक तत्व छात्रों के आंदोलन का फायदा न उठा सके. उन्होंने कहा कि प्रशासन यह भी चाहता है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और स्कूल प्रबंधन तथा छात्रों के बीच जो संवाद का अभाव है, उसे बातचीत के जरिए दूर किया जाए. इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ऐसी जानकारी सामने आई है कि आंदोलन में शामिल कुछ छात्र पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन में भी मौजूद रहे थे. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस इनपुट की अभी पुष्टि की जा रही है. यदि जांच में ऐसा कुछ सामने आता है तो छात्रों को समझाकर उनके बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.

एसपी बोले- डराने नहीं, जानकारी लेने गई थी पुलिस

उधर, छात्रों के आरोपों पर फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने साफ कहा कि पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) की टीम केवल घटनाक्रम की जानकारी जुटाने के लिए छात्रों के घर गई थी. एसपी ने कहा कि किसी छात्र को डराने, धमकाने या थाने बुलाने के लिए दबाव बनाने जैसी बात सही नहीं है. उनके मुताबिक पुलिस की कार्रवाई सामान्य पूछताछ का हिस्सा थी, ताकि पूरे घटनाक्रम की सही जानकारी मिल सके और कानून-व्यवस्था बनी रहे.

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