'अन्वी मेहता' और 'जोसिता पाल' कौन है ये लड़कियां? कैसे बनीं भारत के लिए खतरा

आंध्र प्रदेश की पुलिस ने देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर खुलासा किया है. पुलिस ने कहा है कि पाकिस्तान की महिला इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स जासूसी के ज़रिए संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने के लिए भारत के डिफेंस सेक्टर में काम कर रहे लोगों को निशाना बना रही हैं, वे इसके लिए उन्हें पैसे का लालच देती हैं, हनी ट्रैप में फंसाती हैं, अश्लील तस्वीरें भेजती हैं और झूठे वादे करती हैं.

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पाकिस्तान भारत के नौसैनिक कर्मियों को टारगेट कर रहा है. (Representational photo.) पाकिस्तान भारत के नौसैनिक कर्मियों को टारगेट कर रहा है. (Representational photo.)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:31 PM IST

सोशल मीडिया पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट. फिर धीरे-धीरे दोस्ती, WhatsApp पर घंटों चैट, वॉयस और वीडियो कॉल और इसके बाद देश की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी जानकारी मांगना, जो दुश्मन देश के लिए बेहद अहम हो सकती है. 'अन्वी मेहता' और 'जोसिता पाल' इसी काम में लगी थी. जब आंध्र प्रदेश पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस जांच में इसका खुलासा हुआ तो सुरक्षा गलियारों में सनसनी फैल गई. 

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आंध्र प्रदेश पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया है. इस नेटवर्क में दो युवतियां खास तौर पर जांच के केंद्र में हैं. इनके नाम हैं 'जोसिता पाल' और 'अन्वी मेहता'. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये वास्तव में दो महिलाएं थीं या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के बनाए हुए सिर्फ डिजिटल किरदार.

इस मामले में पुलिस ने पाया कि "जोसिता पाल" नाम की एक PIO (Pakistan Intelligence Operatives) ने पहले फ़ेसबुक के ज़रिए संपर्क किया और बाद में बातचीत वॉट्सऐप पर शुरू की.

पुलिस के मुताबिक उसने खुद को मुंबई की एक जहाज़ बनाने वाली कंपनी की कर्मचारी बताया और जहाज़ों और पनडुब्बियों की आवाजाही और उनकी संख्या के बारे में जानकारी मांगी. साथ ही उसने उनके कमांडिंग अफसरों की तस्वीरें और जानकारी भी मांगी और ऐसी जानकारी साझा करने के बदले पैसे का लालच भी दिया. 

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ऐसी ही कहानी 'अन्वी मेहता' की है. पुलिस के मुताबिक उसने खुद को दिल्ली की एक मनोवैज्ञानिक बताया. उसका तरीका थोड़ा अलग था. वह नौसेना कर्मियों से वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करती थी और कथित तौर पर उन्हें हनीट्रैप में फंसाने की कोशिश करती थी. पुलिस का कहना है कि अन्वी ने नौसैनिक जहाजों और संवेदनशील रक्षा प्रतिष्ठानों की तस्वीरें मांगीं. इतना ही नहीं, वीडियो कॉल के दौरान नौसेना के संवेदनशील इलाकों, जहाजों और पनडुब्बियों को कैमरे में दिखाने के लिए भी उकसाने की कोशिश की गई.

फेक प्रोफाइल से शुरू होता था पूरा खेल

आंध्र प्रदेश पुलिस के मुताबिक कथित पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स पहले Facebook और Instagram पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए भारतीय रक्षा कर्मियों को टारगेट करते थे. भरोसा बनने के बाद बातचीत WhatsApp पर शिफ्ट होती थी. यहां चैट के साथ वॉयस और वीडियो कॉल का इस्तेमाल किया जाता था. इसके बाद लक्ष्य के मुताबिक हनीट्रैप, अश्लील तस्वीरें, भावनात्मक जुड़ाव या पैसों का लालच देकर जानकारी हासिल करने की कोशिश होती थी.

यानी इस मामले में 'अन्वी मेहता' और 'जोसिता पाल' को सिर्फ दो महिलाओं के तौर पर देखना जांच की पूरी तस्वीर नहीं बताता. पुलिस के मुताबिक ये महिला PIOs की इस्तेमाल की गई पहचान है. असली किरदार कहीं और रहता था.  

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WhatsApp OTP तक पहुंच गया जासूसी नेटवर्क

इस मामले की सबसे गंभीर कड़ी सिर्फ हनीट्रैप नहीं है. पुलिस के मुताबिक, कथित ऑपरेटिव्स भारतीय मोबाइल नंबरों और WhatsApp OTP का इस्तेमाल भी कर रहे थे. भारतीय नामों पर हासिल SIM कार्ड और उनसे जुड़े OTP की मदद से पाकिस्तान में WhatsApp अकाउंट एक्टिवेट किए जाने का आरोप है. इन अकाउंट्स का इस्तेमाल आगे दूसरे भारतीय रक्षा कर्मियों से संपर्क और संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए किया जाता था.

पैसों का लेनदेन भी कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी और बिचौलियों के जरिए किया जाता था. यानी सोशल मीडिया की एक साधारण सी दोस्ती के पीछे SIM कार्ड, OTP, WhatsApp अकाउंट, क्रिप्टो पेमेंट और रक्षा सूचनाओं का पूरा नेटवर्क काम कर रहा था.

18 संदिग्ध, 13 नौसेना कर्मी

आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस पूरे मामले को 'ऑपरेशन फायरवॉल-2026' नाम दिया है. जांच में 18 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें 13 नौसेना कर्मी बताए गए हैं. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है- विशाखापत्तनम नेवल बेस के कर्मचारी प्रदीप मुखर्जी और नौसेना अधिकारियों के लिए काम करने वाला कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर अन्नम साई वरप्रसाद. दोनों पर पाकिस्तान से जुड़े कथित ऑपरेटिव्स को संवेदनशील जानकारी देने के आरोप हैं.

अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 'अन्वी मेहता' और 'जोसिता पाल' के नाम के पीछे कौन था, उनसे कितने भारतीय रक्षा कर्मी संपर्क में आए. 
 

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