भारत का सिम कार्ड, यही के लोग, यहीं का पैसा... कंबोडिया से ऐसे चल रहा इंडियंस को डिजिटल अरेस्ट करने का धंधा

इंडिया टुडे की तहकीकात में इस बात का खुलासा हुआ है कि मानव तस्कर भारतीय नागरिकों को नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया ले जा रहे हैं और फिर उनसे ऑनलाइन फ्राड, साइबर क्राइम और फाइनेंशियल फ्राड करवा रहे हैं. इस जुर्म के लिए भारतीय सिम कार्ड्स का ही सहारा लिया जा रहा है.

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कंबोडिया से चल रहा है डिजिटल अरेस्ट करने का धंधा (प्रतीकात्मक तस्वीर) कंबोडिया से चल रहा है डिजिटल अरेस्ट करने का धंधा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अरविंद ओझा / जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

भारत में डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए गृह मंत्रालय की साइबर शाखा ने कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को इन घोटालों के लिए गढ़ के रूप में चिह्नित किया है.

कंबोडिया में स्थित भारतीय दूतावास ने भी यहां नौकरी चाहने वालों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. दूतावास ने भारतीय नागरिकों से 'पर्यटक वीज़ा' पर नौकरी न मांगने का भी आग्रह किया है, जो कंबोडिया में अवैध है.

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परामर्श में कहा गया है, "यह बात संज्ञान में आई है कि कंबोडिया में आकर्षक नौकरी के अवसरों के झूठे वादों से आकर्षित होकर भारतीय नागरिक मानव तस्करों के जाल में फंस रहे है. इन भारतीय नागरिकों को ऑनलाइन स्कैम और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है."

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45000 सिम कार्ड भेजे गए देश से बाहर

आजतक की तहकीकात में पता चला है कि डिजिटल अरेस्ट करने वाले जालसाजों के आईपीडीआर (इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड) का ठिकाना कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम है. इस तरह के घोटाले से जुटाए गए पैसे को दुबई और वियतनाम के एटीएम से निकाला जाता है.

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कंबोडिया, म्यांमार और वियतनाम में बैठे साइबर अपराधी अपने एजेंट्स की मदद से भारतीय सिम कार्ड मंगवाते हैं. जांच में पता चला है कि करीब 45,000 सिम कार्ड कंबोडिया और म्यांमार भेजे गए थे. बाद में भारतीय एजेंसियों ने इन सिम कार्ड को निष्क्रिय कर दिया.

भारतीयों के जरिए ही हो रही है ठगी

यानी भारत का सिम कार्ड, भारत के लोगों से ही साइबर अपराध करवा कर भारत का ही पैसा देश के बाहर बैठे साइबर क्रिमिनल लूट रहे हैं. कंबोडिया,म्यांमार और वियतनाम में बैठे साइबर क्रिमिनल्स के पास भारतीय सिम कार्ड उनके भारतीय एजेंट के जरिए भेजे जाते हैं.

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उत्तराखंड STF ने लगभग 3000 M2M (मशीन टू मशीन) सिम कार्ड को सीज कर चुकी है. जांच में पता चला था कि लगभग 45000 सिम कार्ड्स कंबोडिया और म्यांमार भेजे जा चुके थे जिन्हें  एजेंसियों ने बाद में डीएक्टिवेट करवा दिया था.

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट

गृह मंत्रालय के साइबर विंग के सूत्रों ने बताया कि घोटालेबाज डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए हर दिन करीब 6 करोड़ रुपए उड़ा रहे हैं. इस साल के पहले 10 महीनों में ही घोटालेबाजों ने 2,140 करोड़ रुपए उड़ा लिए हैं. गृह मंत्रालय ने पाया है कि जालसाज ज़्यादातर कंबोडिया में चीनी कैसीनो में स्थित कॉल सेंटरों से काम करते हैं. अक्टूबर तक, साइबर विंग ने डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी से संबंधित 92,334 मामलों की रिपोर्ट की हैं.

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