अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है.
राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले में "जो दिख रहा है उससे कहीं ज्यादा कुछ छिपा है" और एक "समझौता कर चुके पीएम" को भारत के हितों से समझौता करने पर मजबूर किया गया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.
यह पूरा विवाद अमेरिका की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की अदालत के जज निकोलस गारौफिस के फैसले से जुड़ा है. जज ने अमेरिकी न्याय विभाग के उस अनुरोध को मंजूरी दे दी जिसमें गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ विनीत जैन के खिलाफ कई आपराधिक आरोप हटाने की मांग की गई थी. इससे अडानी समूह पर करीब दो साल से मंडरा रहा बड़ा कानूनी खतरा टल गया है, हालांकि अदालत ने आरोपों की सच्चाई पर कोई फैसला नहीं सुनाया.
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10 अगस्त को जारी 47 पन्नों के आदेश में जज गारौफिस ने सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड साजिश से जुड़े तीन आरोप हमेशा के लिए खारिज कर दिए, यानी अब इन्हें दोबारा नहीं लाया जा सकता. लेकिन विदेशी भ्रष्ट आचरण कानून और न्याय में बाधा डालने की साजिश जैसे दो अन्य आरोपों पर फैसला अभी रोक दिया गया है, क्योंकि इनसे जुड़े पांच भारतीय आरोपी अमेरिकी अदालत में पेश ही नहीं हुए. न्याय विभाग को 31 अगस्त तक अदालत की शर्तें पूरी करनी होंगी.
जज ने साफ किया कि यह फैसला आरोपों को गलत साबित नहीं करता. मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई, यानी गवाहों से पूछताछ या सबूतों की जांच नहीं हो पाई. अडानी समूह पहले से ही सभी आरोपों को खारिज करता रहा है. फैसले के बाद गौतम अडानी ने इसे "विनम्रता" के साथ स्वीकार करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताया.
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