संसद परिसर में रात से धरने पर चंद्रशेखर, CJP मार्च के सपोर्ट में बोले- बच्चों पर अत्याचार हुआ

दिल्ली में संसद मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस एक्शन के विरोध में सांसद चंद्रशेखर संसद परिसर में धरने पर बैठ गए हैं. उन्होंने न्याय सुनिश्चित होने तक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया.

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धरने पर बैठे सांसद चंद्रशेखर. (photo: Social Media @BhimArmyChief) धरने पर बैठे सांसद चंद्रशेखर. (photo: Social Media @BhimArmyChief)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

दिल्ली में सोमवार को सीजेपी प्रोटेस्ट्स द्वारा नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुए इस बल प्रयोग के विरोध में कई विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की.

इसी बीच आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर संसद परिसर में बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे सोमवार रात से धरने पर बैठ गए. उन्होंने इस कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए इसे जलियांवाला बाग जैसी बर्बरता करार दिया और न्याय सुनिश्चित होने तक अपना शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया. उन्होंने अपने धरने के दौरान की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की हैं, जिसमें वह रात के दौरान हुई बारिश में भी धरने पर बैठे हैं.

उन्होंने कहा कि जहां संविधान की शपथ ली, आज वहीं संविधान का सम्मान बचाने बैठा हूं. मासूमों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध अपना कर्तव्य निभा रहा हूं. जय भीम, जय भारत.

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सांसद चंद्रशेखर ने जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ हुए व्यवहार पर गहरा दुख जताया. उन्होंने एक्स पर लिखा, ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है, वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है. आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया.

उन्होंने कहा कि उन्होंने जलियांवाला बाग का दौर नहीं देखा, लेकिन सोमवार को जंतर-मंतर से जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद दिला दी.

चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. इस अधिकार पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात है. इसी पीड़ा और संविधान के सम्मान की रक्षा के लिए वह संसद परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए हैं.

उन्होंने ऐलान किया कि जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा ये शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा.

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