फोन पर आवाज आई... मैं तहसीलदार बोल रहा हूं. सरकार की नई स्कीम आई है. कोरोना जैसी नई बीमारी फैल रही है. अगर सिर मुंडवा लेंगे, तो बीमारी भी नहीं होगी और 15 हजार भी मिलेंगे. सोचिए... अगर फोन करने वाला आपका नाम भी बताए, आपके परिवार के लोगों के नाम भी गिना दे, और खुद को सरकारी अफसर बताए... तो आप क्या करेंगे?
ये कहानी तमिलनाडु के सलेम जिले के एक गांव की है. एक फोन कॉल ने पूरे गांव को यकीन दिला दिया कि बाल अब बीमारी की वजह बन चुके हैं. और देखते ही देखते तीन महिलाओं ने अपने सिर के बाल मुंडवा दिए. बाद में पता चला कि न कोई सरकारी स्कीम थी, न कोई तहसीलदार... वो एक शातिर धोखेबाज था.
मामला सलेम जिले के अत्तूर के पास पुथुकोथमपाडी गांव का है. रविवार रात करीब 8 बजे गांव की रहने वाली पलानीअम्मल के मोबाइल पर एक कॉल आया. फोन करने वाले ने खुद को अत्तूर तहसील कार्यालय का तहसीलदार बताया. उसे पलानीअम्मल का नाम ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी पता थे. इसके बाद ठग ने डर और लालच का ऐसा खेल खेला कि लोग उसकी बातों में फंसते चले गए.
उसने दावा किया कि कोरोना जैसी एक नई संक्रामक बीमारी इंसानों के बालों के जरिए फैल रही है. विदेशों में लोग सिर मुंडवाकर इस बीमारी से बच रहे हैं. अब तमिलनाडु सरकार ने भी ऐसी महिलाओं को 15 हजार देने का फैसला किया है, जो सिर मुंडवाएंगी. उसने कहा कि स्कूल और कॉलेज की छात्राओं को 45 हजार और एक लैपटॉप, जबकि पुरुषों को 6 हजार दिए जाएंगे.
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धोखाधड़ी करने वाले ने कहा कि गांव के लिए सिर्फ 18 टोकन मिले हैं. सरकारी अधिकारी अगले दिन दोपहर 2 बजे पैसे लेकर आएंगे. लेकिन एक शर्त है- जिसने पहले से सिर मुंडवा लिया होगा, उसी को पैसा मिलेगा.
बस... इतनी बात काफी थी. गांव में खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. करीब 20 लोग सिर मुंडवाने की तैयारी करने लगे. इनमें 56 साल की कावेरी, 58 साल की रामायी और 60 साल की चित्रा ने बिना देर किए अपने बाल मुंडवा लिए. अगले दिन दोपहर हुई. फिर शाम हो गई.
न कोई सरकारी गाड़ी आई... न कोई अधिकारी. जब महिलाओं ने उस नंबर पर फोन किया, तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला. तभी समझ आया कि वे किसी सरकारी योजना की लाभार्थी नहीं, बल्कि धोखाधड़ी का शिकार बन चुकी हैं. इसके बाद बाकी ग्रामीणों ने भी सिर मुंडवाने का फैसला रद्द कर दिया. अब अत्तूर ग्रामीण पुलिस मामले की जांच कर रही है. कोशिश की जा रही है कि फोन करने वाले की पहचान हो सके. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कॉल करने वाले के पास गांव के लोगों की निजी जानकारी कैसे पहुंची.
प्रमोद माधव