पूर्व CM चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ एक और चार्जशीट दाखिल, अब फाइबर नेट घोटाले का आरोप

कौशल विकास कार्यक्रम घोटाला मामले में जेल में बंद नायडू के खिलाफ सीआईडी ने एक और याचिका कोर्ट में दाखिल की है. विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि फाइबर नेट में घोटाला हुआ है. सीआईडी ने मामले से संबंधित एक नई एफआईआर दर्ज करने के बाद उनके खिलाफ नया वारंट मांगा है.

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आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो) आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो)

अपूर्वा जयचंद्रन

  • अमरावती,
  • 19 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 9:17 PM IST

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कौशल विकास कार्यक्रम घोटाला मामले में जेल में बंद नायडू के खिलाफ सीआईडी ने एक और याचिका कोर्ट में दाखिल की है. विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि फाइबर नेट में घोटाला हुआ है. सीआईडी ने मामले से संबंधित एक नई एफआईआर दर्ज करने के बाद उनके खिलाफ नया वारंट मांगा है.

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सीबीआई ने कहा है कि सरकार ने नियम के विरुद्ध टेरा सॉफ्ट कंपनी को ठेका दिया. सीआईडी का आरोप है कि फाइबर नेट घोटाले में 120 करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार हुआ है. कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है.

बता दें कि कौशल विकास कार्यक्रम घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू जेल में बंद हैं. रविवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि लोक सेवक के रूप में अपने पद पर रहते हुए नायडू ने अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत की और धन का दुरुपयोग किया. भ्रष्ट और अवैध तरीकों से सरकारी खजाने को 279 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ. रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि नायडू आपराधिक साजिश में शामिल हैं. 

कोर्ट ने एक याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला

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आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा कौशल विकास निगम घोटाला मामले में पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया. अदालत ने नायडू और एपी अपराध जांच विभाग के कानूनी सलाहकारों की दलीलें सुनीं.

नायडू का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और सिद्दार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि सीआईडी ने राज्यपाल से पूर्व अनुमति नहीं ली थी क्योंकि पुलिस के लिए जनता द्वारा कथित तौर पर किए गए किसी भी अपराध की जांच या जांच करने के लिए पूर्व अनुमोदन लेना एक अनिवार्य आवश्यकता है. 

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