मुंबई से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित औद्योगिक शहर भिवंडी की मेरी पिछली यात्रा अप्रैल में हुई थी. उस समय मैं पश्चिम एशिया संकट के कारण कपड़ा उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव पर रिपोर्टिंग कर रहा था. इस बार मैं भिवंडी में जल संकट के कारण गया, क्योंकि भिवंडी के कई आवासीय क्षेत्र अपनी दैनिक जरूरतों के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं.
भिवंडी निजामपुर नगर निगम (बीएनएमसी) की सीमा के अंतर्गत आने वाले कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी के मौसम में पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. कई सोसायटी पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं. जरूरत के मुकाबले कम जल और हाल में पानी के कोटे में कटौती इस संकट की मुख्य वजह मानी जा रही है.
भिवंडी में अपना कोई बांध नहीं है, इसलिए यह शहर जल आपूर्ति के लिए अन्य एजेंसियों पर निर्भर है. शहर को वर्तमान में 126 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी मिल रहा है, जबकि पहले इसे 11 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी मिलता था.
इसके बावजूद, नगर निगम का जल आपूर्ति विभाग प्रभावित क्षेत्रों में निवासियों को पानी की कमी से राहत दिलाने के लिए टैंकरों के माध्यम से हरदिन पानी की आपूर्ति कर रहा है.
नगर निगम क्षेत्र की कुल जनसंख्या 12 लाख से अधिक है, और प्रशासन इन नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग योजनाएं लागू कर रहा है. हालांकि, गर्मी के मौसम के आगमन के साथ ही जल की कमी ने नागरिकों को परेशान कर दिया है.
गोकुल नगर की श्री नेमीनाथ दर्शन को-ऑपरेटिव सोसायटी में 104 घर हैं और यहां रोज चार टैंकर पानी पहुंचते हैं. यहां के निवासी संजय चौहान ने कहा, 'अब हम पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं. दो महीने पहले हमें रोज 5 घंटे पानी मिलता था, जो अब घटकर सिर्फ 2 घंटे रह गया है. नगर निगम टैंकर भेज रहा है, इसके लिए हम आभारी हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता.'
सोसायटी के कोषाध्यक्ष भावेश मेहता ने कहा, 'हमारी सोसाइटी 15-20 साल पुरानी है. हम पहले हर चार महीने में सोसाइटी की टंकी साफ करवाते थे, लेकिन अब टैंकर के पानी के कारण हमें इसे हर दो महीने में साफ करवाना पड़ता है. इस पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों को त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं. इलाके में संपत्ति की दरें गिर गई हैं, कई निवासी भिवंडी छोड़कर पलायन कर रहे हैं.'
जैन अपार्टमेंट के निवासी जनक शाह ने भी यही कहा कि हम पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर हैं, हमें नहीं पता कि क्या गड़बड़ हुई है. कई वरिष्ठ नागरिक हैं जो इस पानी की वजह से परेशान हैं.
टैंकरों के माध्यम से पानी की कमी दूर करने की कोशिश
मुंबई नगर निगम (बीएनएमसी) के जल आपूर्ति विभाग के एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर संदीप पटनावर ने बताया कि 12 लाख की आबादी वाले भिवंडी शहर को हरदिन 18 करोड़ लीटर (एमएलडी) पानी की जरूरत होती है. हालांकि, नगर निगम को वर्तमान में इतना पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. 73 एमएलडी एसटीईएम अथॉरिटी से और 42 एमएलडी मुंबई नगर निगम से मिलता होता है. यही वजह से शहर में पानी की कमी हो रही है.
पटवार ने कहा कि, पहले नगर निगम को वरहाला झील से हरदिन 5 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलता था. लेकिन झील में बढ़ते प्रदूषण और पानी के दूषित होने के कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस स्रोत से पीने का पानी लेने पर प्रतिबंध लगा दिया.
पटवार ने बताया इसके अलावा, एसटीईएम अथॉरिटी ने भी हाल ही में अपनी जल आपूर्ति में 6 एमएलडी की कमी कर दी है. इसके बाद शहर के जिन हिस्सों में पानी की कटौती हो रही है, वहां अब टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है.
नगर निगम जल संकट से निपटने के लिए चौबीसों घंटे सातों टैंकर चला रहा है. पटनावर ने कहा, हम बोरवेल और हैंडपंपों से पानी उपलब्ध करा रहे हैं. आपूर्ति लाइन के अंतिम छोर पर स्थित क्षेत्रों में पानी की अधिक कमी है. वरहाला झील की सफाई के प्रयास जारी हैं. भिवंडी के लिए 100 एमएलडी की लाइन को मंजूरी मिल चुकी है. आगे चलकर शहर में जल संकट कम होगा.
मुस्तफा शेख