​'टाटा-बिड़ला, अंबानी आकर खरीद लें...', आखिर अपना ही गांव क्यों बेच रहे हैं ये लोग- VIDEO

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के माढा तालुका के तुलसी गांव में पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने अनोखा आंदोलन शुरू किया है. पिछले 25 वर्षों से ग्रामीण सिना-माढा उपसा जल सिंचाई योजना का पानी गांव तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं. कम बारिश के चलते संकट और गहरा गया है.

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ग्रामीण, जो अपना गांव बेच रहे हैं. (Photo: Screengrabs) ग्रामीण, जो अपना गांव बेच रहे हैं. (Photo: Screengrabs)

नितिन शिंदे

  • सोलापुर,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

'हमारा गांव बिक्री के लिए है, कोई इसे खरीद ले.' महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में लगे इस बैनर ने हर किसी का ध्यान खींच लिया है. गांव के लोगों ने यह ऐलान किसी जमीन या संपत्ति को बेचने के लिए नहीं किया, बल्कि अपनी एक ऐसी समस्या को लेकर किया है, जिसका समाधान वे पिछले करीब 25 वर्षों से मांग रहे हैं. पानी के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अब अपने गांव को ही 'बिक्री के लिए' बता दिया है.

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मामला माढा तालुका के तुलसी गांव का है. यहां ग्रामीण लंबे समय से सिना-माढा उपसा जल सिंचाई योजना का पानी गांव तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उजनी बांध से वर्ष 2000 में सिना-माढा योजना शुरू की गई थी. शुरुआत में तुलसी गांव को इस योजना से बाहर रखा गया था.

बारिश कम हुई तो बढ़ गई मुश्किल
इसके बाद ग्रामीणों ने लगातार ज्ञापन दिए, अधिकारियों से गुहार लगाई और कई बार आंदोलन किया. लंबे संघर्ष के बाद कागजों में तुलसी गांव को योजना में शामिल भी किया गया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि योजना में शामिल होने के बावजूद आज तक पानी गांव की सीमा तक नहीं पहुंच पाया है.

इस साल कम बारिश ने गांव की मुश्किल और बढ़ा दी है. ग्रामीणों के मुताबिक, पीने के पानी के साथ खेती के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है. पानी की कमी का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है. ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव तक सिना-माढा योजना का पानी पहुंच जाए तो उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकता है.

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12 किसानों ने शुरू किया आमरण अनशन
पानी की मांग को लेकर उजनी पानी संघर्ष समिति के नेतृत्व में 14 अक्टूबर से तुलसी गांव में 12 किसानों ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया है. ग्रामीणों के मुताबिक, अनशन के पांच दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसके बाद आंदोलन को और तीखा करने का फैसला लिया गया.

'टाटा-बिड़ला, अंबानी आकर गांव खरीद लें'
प्रशासन की कथित उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने गांव में एक बैनर लगा दिया, जिस पर लिखा है- 'हमारा गांव बिक्री के लिए है, कोई इसे खरीद ले.' ग्रामीणों ने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि टाटा-बिड़ला या अंबानी आकर गांव खरीद लें और उन्हें पानी उपलब्ध करा दें.

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है. इसका असर गांव की रोजमर्रा की जिंदगी और सामाजिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. ग्रामीणों के बीच यह बात भी उठाई जा रही है कि पानी की सुविधा नहीं होने के कारण युवाओं की शादियों में भी दिक्कतें आ रही हैं.

अब ग्रामीणों की मांग साफ है- सिना-माढा उपसा जल सिंचाई योजना का पानी जल्द से जल्द तुलसी गांव तक पहुंचाया जाए. 'गांव बिक्री के लिए है' का बैनर लगाकर ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की है. देखना होगा कि इस अनोखे आंदोलन के बाद वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या पर प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है.

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