केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को खुद ही मुंबई के ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ गया. जाम के कारण वह 22वें इंडो-अमेरिकन कॉर्पोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 के कार्यक्रम में करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे. कार्यक्रम में देरी से पहुंचने के बाद गडकरी ने इसके लिए माफी मांगी. इसके साथ ही उन्होंने मुंबई और दूसरे शहरों में ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए पुराने फ्लाईओवर की जगह नई तकनीक अपनाने की जरूरत बताई.
गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस संबंध में सुझाव देने की बात कही. उन्होंने कहा कि पहले बनाए गए कई फ्लाईओवर अब बढ़ते ट्रैफिक के कारण बाधा बन रहे हैं. ऐसे में नई तकनीक की मदद से मल्टी-लेवल फ्लाईओवर बनाने की जरूरत है.
एक ही पिलर पर तीन फ्लाईओवर, चौथे लेवल पर मेट्रो
गडकरी ने पुणे में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की फ्लाईओवर परियोजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि इसके लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस तकनीक में एक ही पिलर पर अलग-अलग स्तर बनाए जा सकते हैं. गडकरी ने कहा, 'अब पुणे में हम 50 हजार करोड़ रुपये के फ्लाईओवर बना रहे हैं.
ये सभी पुराने फ्लाईओवर अब बाधा बन रहे हैं. इसलिए मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सुझाव दिया है कि हमें नए फ्लाईओवर बनाने होंगे. इसमें पहले, दूसरे और तीसरे स्तर पर फ्लाईओवर होंगे और चौथे स्तर पर उसी पिलर पर मेट्रो चलेगी.'
उन्होंने बताया कि यह तकनीक हाल ही में मलेशिया से मिली है और भारत ने इसे अपनाया है. गडकरी के मुताबिक, बढ़ते शहरी ट्रैफिक को देखते हुए पारंपरिक बुनियादी ढांचे की जगह आधुनिक मल्टी-लेवल व्यवस्था की जरूरत है.
भारत-अमेरिका सहयोग पर क्या बोले गडकरी?
कार्यक्रम में गडकरी ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के हितधारकों के बीच सहयोग, समन्वय और संवाद बढ़ाने की जरूरत है और इसमें इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि यह पहचानना जरूरी है कि भारत और अमेरिका की ताकत क्या है और किन क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं. भारत के पास बड़ी क्षमता है, जबकि अमेरिका के पास संसाधन और उन्नत तकनीक है. दोनों की ताकत को साथ लाकर 'विन-विन' स्थिति बनाई जा सकती है.
गडकरी ने ज्ञान, इनोवेशन, उद्यमिता, विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान को भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि भविष्य में ज्ञान को संपत्ति में बदलना जरूरी है. कृषि से लेकर रक्षा तक हर क्षेत्र में तकनीक की जरूरत है. अमेरिका तकनीक के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी है, इसलिए अमेरिकी उद्योगों के साथ सहयोग का यह सही समय है.
'जापान को पीछे छोड़ तीसरे नंबर पर पहुंचा भारत'
गडकरी ने भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की बढ़ती ताकत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत जापान को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन गया है.
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी, तब भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये हो गया है. गडकरी के मुताबिक, अमेरिका इस मामले में पहले और चीन दूसरे स्थान पर है. उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग की यह वृद्धि देश की बढ़ती आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को दिखाती है.
दीपेश त्रिपाठी