'अगर यह ग्राउंड भी गया तो फुटबॉल सितारे कहां से मिलेंगे?' BMC के फैसले से खिलाड़ी निराश

मुंबई के बांद्रा स्थित ऐतिहासिक नेवल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड को कन्वेंशन सेंटर बनाने की बीएमसी की योजना को हरी झंडी मिल गई है. इस फैसले से स्थानीय खिलाड़ियों, रेफरी और फुटबॉल प्रेमियों में गहरा आक्रोश है. उनका कहना है कि खेल मैदान छिनने से भारतीय फुटबॉल का भविष्य और ऐतिहासिक पहचान दोनों खतरे में पड़ जाएंगे.

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मुंबई के नेवल डिसूजा ग्राउंड पर संकट मंडरा रहा है. (Photo-ITG) मुंबई के नेवल डिसूजा ग्राउंड पर संकट मंडरा रहा है. (Photo-ITG)

दीपेश त्रिपाठी

  • मुंबई,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:16 PM IST

मुंबई के बांद्रा स्थित ऐतिहासिक नेवल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड को कन्वेंशन सेंटर में बदलने के प्रस्ताव को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के फैसले के बाद खिलाड़ियों, रेफरी और फुटबॉल प्रेमियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है. उनका कहना है कि अगर यह मैदान भी खत्म हो गया तो मुंबई में फुटबॉल का भविष्य संकट में पड़ जाएगा.

मैदान पर रोज अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों का कहना है कि मुंबई में पहले ही फुटबॉल के लिए बहुत कम मैदान बचे हैं. ऐसे में नेवल डिसूजा ग्राउंड को कन्वेंशन सेंटर में बदलना खेल और खिलाड़ियों, दोनों के लिए बड़ा झटका है.

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खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें इस फैसले की जानकारी हाल ही में मिली और इसके बाद से फुटबॉल समुदाय में निराशा का माहौल है. उनका कहना है कि यह मैदान सिर्फ एक खेल परिसर नहीं, बल्कि सैकड़ों खिलाड़ियों के सपनों का केंद्र है. फुटबॉल खिलाड़ियों ने बताया कि कई दिनों से इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था. लोगों ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया और याचिका दायर कर मैदान को बचाने की मांग की, लेकिन इसके बावजूद उनकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं.

खिलाड़ियों में गहरी निराशा

खिलाड़ियों का कहना है कि वे पिछले 10 वर्षों से इस मैदान पर खेल रहे हैं. उनके मुताबिक, यह मैदान बच्चों और युवा खिलाड़ियों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है. यदि यह मैदान समाप्त हो गया तो नई पीढ़ी के लिए फुटबॉल में आगे बढ़ने के अवसर भी सीमित हो जाएंगे.

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फुटबॉल प्रेमियों ने कहा कि नेवल डिसूजा सिर्फ एक नाम नहीं है, बल्कि भारतीय फुटबॉल के गौरव का प्रतीक हैं. नेवल डिसूजा पहले भारतीय फुटबॉलर थे, जिन्होंने ओलंपिक में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलों की हैट्रिक लगाई थी. खिलाड़ियों का कहना है कि यदि यह मैदान खत्म हो गया तो सिर्फ एक खेल मैदान नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की एक पहचान भी खत्म हो जाएगी.

खिलाड़ियों ने यह भी बताया कि उनके पास अभ्यास के लिए बहुत कम विकल्प हैं. कई महिला टीमें, क्लब और विभिन्न डिवीजनों के खिलाड़ी इसी मैदान पर अभ्यास करते हैं. ऐसे में किसी दूसरे मैदान पर स्थानांतरित होना आसान नहीं होगा. 

खिलाड़ियों ने बीएमसी और प्रशासन से गुहार लगाते हुए सवाल उठाते हुए कहा, "अगर मुंबई के बचे-कुचे मैदान भी इसी तरह कन्वेंशन सेंटरों में बदल दिए जाएंगे, तो भविष्य में भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए फुटबॉल के नए सितारे कहां से निकलेंगे? बच्चों के खेलने के लिए जगह ही नहीं बचेगी तो खेल का विकास कैसे होगा?" उनका सवाल है कि यदि बच्चों से यह मैदान छिन गया तो भविष्य में भारतीय फुटबॉल को नए सितारे कहां से मिलेंगे.

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