'जेल भेज देंगे! BMC कमिश्नर की नवंबर की सैलरी भी रोकेंगे...', सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया अवमानना का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के बोरीवली में BEST बस स्टेशन की जमीन से अतिक्रमण हटाने में विफलता पर BMC कमिश्नर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है. कोर्ट ने कमिश्नर और उनके स्टाफ की सैलरी पर रोक लगा दी है और 5 लाख रुपये की कॉस्ट भी लगाई है.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट ने BMC को फटकार लगाई है सुप्रीम कोर्ट ने BMC को फटकार लगाई है

विद्या

  • मुंबई,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:53 PM IST

मुंबई के बोरीवली में बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के बस स्टेशन के लिए निर्धारित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर पालिका (BMC) के कमिश्नर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बीएमसी कमिश्नर और उनके स्टाफ की सैलरी के भुगतान पर रोक लगाने का आदेश दिया. साथ ही अतिरिक्त समय मांगने वाली याचिका खारिज करते हुए 5 लाख रुपये की कॉस्ट भी लगाई.

Advertisement

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने बीएमसी कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अदालत ने पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए.

'जेल भेजेंगे, तब समझ आएगी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहमियत'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी के अधिकारियों की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या बीएमसी के अधिकारी अतिक्रमण करने वालों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं?

सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, 'क्या इससे यह नहीं दिखता कि आपके अधिकारी मिलीभगत कर रहे हैं? हम उन्हें जेल भेजेंगे, तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहमियत समझ आएगी. क्या वह हम पर कोई एहसान कर रहे हैं?' चीफ जस्टिस ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन है, जिसमें अतिक्रमण करने वालों के साथ सीधी मिलीभगत और समर्थन दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अदालत इन टिप्पणियों को अपने आदेश में भी दर्ज कर सकती है.

Advertisement

यह भी पढ़िएः 'BMC का एक्शन परेशान करने वाला...', HC ने दिवाली पर दीया मिर्जा का वीडियो बहाल करने का दिया सुझाव

1 दिसंबर तक सैलरी पर रोक

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि बीएमसी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किए बिना अतिरिक्त राहत की मांग नहीं कर सकता. उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले आदेश का पालन किया जाए और उसके बाद उचित राहत के लिए आवेदन दाखिल किया जा सकता है. फिलहाल यह अदालत की अवमानना का मामला है. जस्टिस बागची ने बीएमसी के वकील से कहा, 'आपको 1 दिसंबर 2026 तक सैलरी नहीं मिलेगी. उससे पहले आदेश का पालन कीजिए. इसके बाद अदालत आइए, फिर आप अपनी सैलरी ले सकते हैं.'

अदालत ने निर्देश दिया कि कारण बताओ नोटिस पर फैसला होने तक कमिश्नर और उनके स्टाफ के वेतन का भुगतान रोका जाए.

मराठी दस्तावेजों के अनुवाद की दलील पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से दलील दी गई कि स्थानीय अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले मराठी दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराने की जरूरत है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. जस्टिस बागची ने सवाल किया कि हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी डॉ. तांबे हैं. क्या अदालत यह मान ले कि उन्हें मराठी भाषा नहीं आती?

Advertisement

बीएमसी के वकील ने अदालत से आदेश का पूरी तरह पालन करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन पीठ ने इसे खारिज कर दिया. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि आवेदन खारिज किया जा रहा है और एक दिन का भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा. अधिकारियों को आधी रात तक बैठकर आदेश पारित करने पड़ें तो करें. उन्हें पता चलना चाहिए कि काम कैसे किया जाता है.'

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद मुंबई के बोरीवली में एक सार्वजनिक BEST बस स्टेशन की जमीन से जुड़ा है. इस जमीन को लेकर बीएमसी और एक निजी डेवलपर के बीच कई वर्षों से कानूनी विवाद चल रहा है. 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निजी डेवलपर को निर्देश दिया था कि वह प्रशासनिक भवन सहित संबंधित भूखंड का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा बीएमसी को सौंप दे.

अदालत ने बीएमसी को तीन महीने का समय दिया था. इस दौरान बीएमसी को जमीन का कब्जा लेना था, कानून के मुताबिक शेष अतिक्रमण हटाना था और बस स्टेशन को पूरी तरह चालू करना था. हालांकि, 13 नवंबर 2025 तक जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई थी. अदालत ने बीएमसी कमिश्नर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था.

Advertisement

इस हलफनामे में जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों की सूची, उन्हें जारी किए गए बेदखली नोटिस और किरायेदारी या मालिकाना हक से संबंधित लंबित दावों का विवरण देने को कहा गया था. अब आदेश का पालन नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »