'नवजात को गैर-कमाऊ नहीं मान सकते', ट्रक हादसे में हुई थी बच्चे की मौत, पेरेंट्स को मिलेगा 15.10 लाख मुआवजा

ठाणे के की एक अदालत ने एक दुर्घटना में आठ महीने के बच्चे की मौत पर उसके माता-पिता को 15.10 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया है. ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी और ट्रक मालिक को संयुक्त रूप से भुगतान करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने बच्चे को बिना कमाई वाला व्यक्ति नहीं माना और मुआवजे की रकम कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर तय की.

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2018 में 8 महीने के नवजात की हादसे में मौत हो गई थी. (Photo- Representational) 2018 में 8 महीने के नवजात की हादसे में मौत हो गई थी. (Photo- Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:36 PM IST

महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने बड़ा फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल ने साल 2018 में एक ट्रक की टक्कर से जान गंवाने वाले आठ महीने के बच्चे के पेरेंट्स को 15.10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. 

कोर्ट ने कहा कि मुआवजा तय करते समय किसी बच्चे को 'बिना कमाई करने वाला व्यक्ति' नहीं माना जा सकता. MACT के चेयरमैन और मुख्य जिला न्यायाधीश आर.डी सावंत ने ये फैसला सुनाया.

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अदालत ने ट्रक मालिक दिनकर माने और एक निजी बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है. इसके तहत पीड़ित परिवार के लिए मुआवजा राशि 15,10,288 रुपये तय की गई है.

2018 में हुआ था हादसा

बता दें कि 6 जून 2018 को ठाणे के वागले एस्टेट में मोहम्मद उस्मान माहिबूब नायक और उनकी पत्नी अपने एक रिश्तेदार के घर गए थे. उनका आठ महीने का बेटा सुल्तान फुटपाथ पर खेल रहा था. इसी दौरान एक ट्रक तेज रफ्तार में बैक हुआ और लोहे की ग्रिल वाली दीवार से जा टकराया. टक्कर इतनी जोरदार थी कि दीवार सीधे मासूम सुल्तान पर गिर गई.

सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई थी. हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था.

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बीमा कंपनी की दलीलें खारिज

बीमा कंपनी ने दावों का विरोध किया था. कंपनी ने तर्क दिया कि माता-पिता की लापरवाही के कारण बच्चा फुटपाथ पर खेल रहा था. उन्होंने ये भी दावा किया कि ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था.

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इन दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनी अपने दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत या परिवहन अधिकारियों को पेश नहीं कर सकी. ट्रिब्यूनल ने कहा, 'अगर ट्रक ने टक्कर न मारी होती और दीवार न गिरती, तो ये हादसा नहीं होता. मृतक एक छोटा बच्चा था जो फुटपाथ पर खेल रहा था.'

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, हादसे में जान गंवाने वाले नाबालिग बच्चे को मुआवजा तय करने के लिए बिना कमाई वाले व्यक्ति की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि वो उस समय किसी रोजगार में नहीं था. ऐसे मामलों में, आय के नुकसान की गणना उस राज्य में कुशल श्रमिक को मिलने वाले न्यूनतम वेतन के आधार पर की जानी चाहिए.'

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कोर्ट ने क्यों माना कुशल श्रमिक के बराबर?

मुआवजे की रकम के लिए कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया. ट्रिब्यूनल ने बच्चे की काल्पनिक आय 9,526 रुपये प्रति माह मानी. इसमें भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 फीसदी जोड़ा गया और व्यक्तिगत खर्चों के लिए आधा हिस्सा घटा दिया गया. इसके बाद 18 का मल्टीप्लायर करके मुआवजे की रकम तय की गई.

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