मामू-भांजा दरगाह विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई वन विभाग की तोड़फोड़ पर रोक, सरकार को भेजा नोटिस

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे की हजरत पीर मामू भांजे दरगाह में कथित अवैध निर्माण को लेकर वन विभाग की तोड़फोड़ पर 10 अगस्त तक अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत ने अधिकारियों के बदले हुए रुख पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र सरकार और वन विभाग से जवाब मांगा है.

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने दरगाह में तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है. (File photo) बॉम्बे हाईकोर्ट ने दरगाह में तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है. (File photo)

विद्या

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को ठाणे जिले स्थित हजरत पीर मामू भांजे दरगाह से जुड़े कथित अवैध निर्माण को लेकर वन विभाग की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी. अदालत ने फिलहाल वन अधिकारियों को दरगाह परिसर में किसी भी तरह की आगे की तोड़फोड़ करने से रोक दिया है.

जस्टिस एन. जे. जमादार की एकल पीठ दरगाह ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. ट्रस्ट ने 9 जुलाई 2026 को सहायक वन संरक्षक (उत्तर), येऊर की ओर से जारी अंतिम बेदखली नोटिस को चुनौती दी है. इस नोटिस में दरगाह परिसर में वन भूमि पर कथित अवैध निर्माण को आठ दिन के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया था. इसके साथ ही कहा गया था कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वन विभाग खुद निर्माण हटाएगा और उसका खर्च भी ट्रस्ट से वसूलेगा.

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दरगाह ट्रस्ट की ओर से पेश एडवोकेट अमोघ सिंह ने अदालत को बताया कि इससे पहले भी इसी मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. उस समय वन विभाग ने अदालत को बताया था कि इस मामले में मुंबई के बोरीवली स्थित संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के समक्ष अपील करने का प्रावधान है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पहले याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए ट्रस्ट को वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की सलाह दी थी.

वन विभाग की तरफ से की गई कार्रवाई

याचिकाकर्ता के अनुसार, ट्रस्ट ने अदालत के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारी के समक्ष अपील भी दाखिल कर दी थी. हालांकि, इसी महीने वन विभाग ने एक नया नोटिस जारी कर कहा कि अपील का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और पहले अदालत में दी गई जानकारी गलती से दर्ज हो गई थी. इसके बाद विभाग ने दरगाह परिसर में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी.

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वन विभाग की ओर से पेश एडवोकेट कौशिक म्हात्रे ने अदालत में कहा कि दरगाह ट्रस्ट को 17 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए बुलाया गया था, लेकिन उसके प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुए. इसलिए विभाग की कार्रवाई पूरी तरह उचित थी. हालांकि, जस्टिस जमादार ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग ने पहले अदालत को यह विश्वास दिलाया था कि अपील का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है. उसी आधार पर अदालत ने पहले की याचिका का निपटारा किया था. अब विभाग का अपने ही रुख से पीछे हटना याचिकाकर्ता को असमंजस की स्थिति में छोड़ देता है.

कोर्ट ने नोटिस जारी किया

अदालत ने टिप्पणी की कि अधिकारियों के इस बदले हुए रुख से अदालत भी असहज है. यदि विभाग ने पहले अदालत को एक स्थिति बताकर आदेश हासिल किया है, तो बाद में उसी बात से मुकरकर दबाव वाली कार्रवाई को सही नहीं ठहरा सकता. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और संबंधित वन अधिकारियों को नोटिस जारी किया. साथ ही, दरगाह ट्रस्ट को अंतरिम राहत देते हुए 10 अगस्त 2026 तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ पर रोक लगा दी. अदालत ने प्रतिवादियों को 6 अगस्त तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी.

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