'घड़ियाली आंसू बहा रहा, ये तो मजाक है', कोर्ट ने खारिज की मौलाना की जमानत याचिका

मुंबई की विशेष अदालत ने अमरावती के उमेश कोल्हे हत्याकांड में आरोपी मौलाना मुशफिक अहमद की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज कर दी है. अदालत ने मुकदमे में हो रही देरी को लेकर कहा कि आरोपी स्पीडी ट्रायल के लिए 'घड़ियाली आंसू' बहा रहा है.

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अदालत ने उमेश कोल्हे मर्डर के आरोपी की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज कर दी. (Photo- ITGD) अदालत ने उमेश कोल्हे मर्डर के आरोपी की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज कर दी. (Photo- ITGD)

विद्या

  • मुंबई,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

अमरावती के उमेश कोल्हे हत्याकांड मामले में मुंबई की एक विशेष अदालत ने आरोपी मौलाना की जमानत याचिका को दूसरी बार खारिज कर दिया है. अदालत ने सुनवाई में हो रही देरी को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी स्पीडी ट्रायल के लिए 'घड़ियाली आंसू' बहा रहा है और ये कुछ नहीं बल्कि एक मजाक हैं.

विशेष न्यायाधीश सीएस बाविस्कर ने आरोपी मौलाना मुशफिक अहमद की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि मुकदमे को लंबा खींचकर आरोपियों को कोई नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि असली दर्द पीड़ित के उन करीबियों को उठानी पड़ी है, जिन्हें समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है.

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अदालत ने कहा कि हालांकि आरोपी को स्पीडी ट्रायल का अधिकार है. ये बात सही है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद से अब तक इस मामले में आरोप तय (चार्ज फ्रेम) नहीं हो पाए हैं. लेकिन इस देरी के लिए कोई और नहीं बल्कि खुद इस मामले के 11 आरोपी जिम्मेदार हैं.

कोर्ट के मुताबिक एक के बाद एक आरोपियों के जमानत और डिस्चार्ज याचिकाएं दाखिल किए जाने और फिर ऊपरी अदालतों का रुख करने के कारण ही ये मुकदमा लंबा खिंचा है.

क्या था पूरा मामला?

महाराष्ट्र के अमरावती में 21 जून 2022 को केमिस्ट उमेश कोल्हे (54) की हत्या कर दी गई थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने निलंबित बीजेपी नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था.

NIA की जांच के मुताबिक, आरोपी मौलाना और उसके साथियों ने नूपुर शर्मा के विवादित बयान के बाद 'मीटिंग ओनली' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था. NIA का आरोप है कि मौलाना इस पूरी साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड है. उसने उमेश कोल्हे की हत्या से पहले और बाद में आरोपियों से जानकारी ली, पूरी घटना की निगरानी की और हत्या के बाद हमलावरों को छिपने के लिए पनाह और पैसे भी मुहैया कराए थे.

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बचाव पक्ष और NIA के तर्क

सुनवाई के दौरान मौलाना की वकील पायोषी रॉय ने दलील दी कि उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. उनके और बाकी आरोपियों के बीच सिर्फ कुछ कॉल्स और एक SMS भेजा गया था, जिसे हत्या की साजिश नहीं कहा जा सकता. इसके अलावा महामारी के दौरान मौलाना 'राहेबर हेल्पलाइन' एनजीओ के जरिए सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे थे.

वहीं, NIA ने अदालत को बताया कि आरोपी खुद ही कानूनी प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं. अदालत ने भी माना कि सभी आरोपियों को एक ही दिन चार्जशीट की कॉपी मिल गई थी. लेकिन वो जानबूझकर अलग-अलग समय पर बार-बार जमानत याचिकाएं और डिस्चार्ज अर्जी दाखिल कर रहे हैं ताकि मामले की सुनवाई को टाला जा सके.

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NIA का कहना है कि आरोपी लंबी कैद का आधार बनाकर रिहाई की मांग करने के लिए ऐसा कर रहे हैं. ऐसे में सबूतों को देखते हुए विशेष अदालत ने मौलाना की जमानत याचिका खारिज कर दी.

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