घर में मिले 39 सबसे जहरीले सांप के बच्चे, पास ही बैठी थी फन फैलाए उनकी मां

अमरावती जिले के मोर्शी में एक घर के परिसर से भारत के सबसे विषैले सांपों में शामिल रसेल्स वाइपर और उसके 39 बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया. घर वन क्षेत्र से सटा होने के कारण सांप के वहां पहुंचने की संभावना जताई गई है. विशेषज्ञों ने लोगों से बरसात के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है.

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घर के परिसर में मिला जहरीले सांप का पूरा कुनबा. (Photo: Representational) घर के परिसर में मिला जहरीले सांप का पूरा कुनबा. (Photo: Representational)

धनंजय साबले

  • अमरावती ,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:48 PM IST

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मोर्शी तहसील शहर में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक घर के परिसर में भारत के सबसे खतरनाक जहरीले सांपों में शामिल श्रृंखलित फुरसा यानी रसेल्स वाइपर और उसके 39 बच्चे एक साथ मिले. एक ही जगह पर इतने बड़े संख्या में जहरीले सांपों के बच्चे मिलने की खबर से पूरे इलाके में दहशत फैल गई. सूचना मिलते ही सर्पमित्रों की टीम मौके पर पहुंची और मादा सांप सहित सभी बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू किया.

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यह घटना मोर्शी शहर की समर्थ कॉलोनी में रहने वाले रूपेश उज्जैनकर के घर की है. परिवार के लोगों ने घर के परिसर में कई छोटे-छोटे सांप रेंगते हुए देखे. जब उन्होंने ध्यान से देखा तो वहां उनकी मां भी मौजूद थी, जिसकी पहचान श्रृंखलित फुरसा यानी रसेल्स वाइपर के रूप में हुई. यह सांप भारत के सबसे जहरीले सांपों में गिना जाता है.

घटना की जानकारी मिलते ही जीवनसेतू जलमित्र आपदा बचाव बहुउद्देशीय संस्था और CARS संस्था की संयुक्त रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची. प्रशिक्षित सर्पमित्रों ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए बेहद सावधानी से रेस्क्यू अभियान शुरू किया. टीम ने मादा सांप और उसके सभी 39 बच्चों को सुरक्षित पकड़ लिया. पूरी कार्रवाई के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी व्यक्ति को कोई नुकसान न पहुंचे.

घर के आंगन में बिछा था जहरीले सांपों का डेरा

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रेस्क्यू पूरा होने के बाद सभी सांपों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक वन्य आवास में छोड़ दिया गया. इसके बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली. विशेषज्ञों के अनुसार श्रृंखलित फुरसा यानी रसेल्स वाइपर भारत के सबसे खतरनाक विषैले सांपों में से एक है. इसके जहर का असर बहुत तेज होता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है. यही वजह है कि इस सांप को बेहद खतरनाक माना जाता है.

सेल्स वाइपर और उसके 39 बच्चे एक साथ मिले

विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में ऐसे सांप अक्सर सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं. बताया गया कि रूपेश उज्जैनकर का घर वन क्षेत्र की सीमा से सटा हुआ है. संभावना है कि इसी कारण मादा सांप घर के परिसर तक पहुंची और उसने वहीं बच्चों को जन्म दिया.

इस सफल रेस्क्यू अभियान में जीवनसेतू जलमित्र आपदा बचाव बहुउद्देशीय संस्था के प्रियाश तायवाडे, विवेक सावरकर, शेषाद्री वायले, श्रवण खुरपे और तौफीक शेख ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा CARS संस्था के अभय धामेधर और महेश बाबुले भी रेस्क्यू टीम का हिस्सा रहे.

खतरनाक सांपों में शामिल रसेल्स वाइपर

घटना के बाद सर्प विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में अपने घर, आंगन, लकड़ी के ढेर, झाड़ियों और घास-फूस के आसपास विशेष सावधानी रखें. यदि कहीं श्रृंखलित फुरसा या कोई अन्य सांप दिखाई दे तो उसे मारने या पकड़ने की कोशिश न करें. ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्रों को सूचना दें, ताकि सांप और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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