झारखंड: रिम्स में लगी एडवांस सीटी स्कैन मशीन, 10 करोड़ है कीमत

प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि यह मशीन गंभीर बीमारियों के जांच में मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और रिम्स के डायरेक्टर डॉक्टर कामेश्वर प्रसाद की पहल पर इस मशीन की खरीददारी हो पाई है. इस मशीन के रिपोर्ट के आधार पर रिसर्च में भी मदद मिलेगी. इसके जरिए हार्ट ब्लॉकेज की 3डी तस्वीर सामने आएगी.

Advertisement
रांची रिम्स में लगी सीटी स्कैन की नई मशीन रांची रिम्स में लगी सीटी स्कैन की नई मशीन

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 24 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 10:46 PM IST
  • जर्मनी से आई नई सीटी स्कैन मशीन
  • इसके जरिए हार्ट ब्लॉकेज की 3डी तस्वीर सामने आएगी

झारखंड सरकार की पहल पर राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस यानी रिम्स के ट्रामा सेंटर में एक खास मशीन स्थापित की गई है. यह बिहार और झारखंड में अब तक की सबसे एडवांस सीटी स्कैन मशीन है. इस मशीन को जर्मनी से मंगाया गया है. 10 साल के मेंटेनेंस कॉस्ट को जोड़ दें तो इस मशीन की कीमत 10 करोड़ रुपए से ज्यादा हैं. 

Advertisement

बताया जा रहा है कि यह मशीन गंभीर बीमारियों के जांच में मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और रिम्स के डायरेक्टर डॉक्टर कामेश्वर प्रसाद की पहल पर इस मशीन की खरीददारी हो पाई है. इस मशीन के रिपोर्ट के आधार पर रिसर्च में भी मदद मिलेगी. इसके जरिए हार्ट ब्लॉकेज की 3डी तस्वीर सामने आएगी. 

एंजियोग्राफी में नहीं होगी परेशानी

हार्ट ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए इनवेसिव इमेजिंग टेक्निक के जरिए एंजियोग्राफी होती थी. इस दौरान मरीजों को तकलीफ भी होती थी. लेकिन सीटी एंजियोग्राफी के दौरान मरीज को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी. आमतौर पर हार्ट में कुछ प्रॉब्लम की शिकायत के बाद भी लोग एंजियोग्राफी से बचने की कोशिश करते हैं. जिसकी वजह से आगे चलकर बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है. 

Advertisement

ट्रॉमा सेंटर में पदस्थ रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर नवीन कुमार ने बताया कि फिलहाल सिटी एंजियोग्राफी के लिए झारखंड के लोग कोलकाता या दिल्ली जाया करते थे. लेकिन अब लोगों को यह सुविधा रांची में ही मिलने लगेगी. उन्होंने कहा कि यह 256 स्लाइस वाली सिटी मशीन है. यह बिहार- झारखंड की अब तक की सबसे एडवांस मशीन है. 

ट्रामा सेंटर में इस अत्याधुनिक मशीन को इंस्टॉल कर दिया गया है. अब सिर्फ एटॉमिक एनर्जी रिसर्च बोर्ड की तरफ से परमिशन मिलने का इंतजार है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अक्टूबर महीने से मरीजों को इसकी सुविधा मिलने लगेगी. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »