डिजिटल फुटप्रिंट्स, यूएपीए का केस और 6 जिलों में रेड... कश्मीर में ऑनलाइन कट्टरपंथ पर कार्रवाई का पूरा ब्योरा

जम्मू-कश्मीर पुलिस के काउंटर-इंटेलिजेंस विंग ने घाटी के कई जिलों में ऑनलाइन कट्टरपंथ और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए छापेमारी की. बडगाम जिले के मागाम इलाके के सिराज नबी पारे नामक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया, जो सोशल मीडिया पर चरमपंथी पोस्ट और आतंकवादियों का महिमामंडन कर रहा था.

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जम्मू-कश्मीर पुलिस के CIK विंग ने घाटी के 6 जिलों में छापा मारा. (फाइल फोटो-PTI) जम्मू-कश्मीर पुलिस के CIK विंग ने घाटी के 6 जिलों में छापा मारा. (फाइल फोटो-PTI)

aajtak.in

  • श्रीनगर,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:34 PM IST

जम्मू-कश्मीर पुलिस के काउंटर-इंटेलिजेंस विंग ने शनिवार को घाटी में कई जगहों पर बड़ी छापेमारी की. पुलिस का यह एक्शन ऑनलाइन कट्टरपंथ, सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए चलाया गया है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, कुपवाड़ा, बारामूला, बडगाम, अनंतनाग, शोपियन और बांदीपोरा जैसे जिलों में ये छापेमारी की गई. श्रीनगर के सीआईके पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में यह कार्रवाई की गई है. इस मामले में आईपीसी की धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत केस दर्ज किया गया है.

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दरअसल, काउन्टर इंटेलिजेंस कश्मीर CIK की टीम ने सोशल मीडिया की गतिविधियों की बारीकी से जांच की थी. जांच के दौरान बडगाम जिले के मागाम इलाके के रहने वाले सिराज नबी पारे नाम के एक संदिग्ध की पहचान हुई. आरोप है कि वह एक ऐसा सोशल मीडिया अकाउंट चला रहा था, जिसके जरिए चरमपंथी और कट्टर विचार फैलाए जा रहे थे.

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आतंकवादियों का किया जा रहा था महिमामंडन

अधिकारियों ने बताया कि इस सोशल मीडिया अकाउंट पर कई ऐसे पोस्ट, तस्वीरें और डिजिटल सामग्रियां मिलीं जो देशविरोधी और कट्टरता को बढ़ावा देने वाली थीं. इन पोस्ट में आतंकवादियों का महिमामंडन किया जा रहा था और युवाओं को भड़काने वाले नैरेटिव फैलाए जा रहे थे.

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छापेमारी के बाद संदिग्ध को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. अदालत के आदेश पर संदिग्ध को 17 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और फिलहाल उसे श्रीनगर की सेंट्रल जेल में रखा गया है.

पुलिस अब उसके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस की गहराई से जांच कर रही है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस ऑनलाइन नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह सामग्री कहां से शेयर की जा रही थी.

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