जम्मू में रोहिंग्या शरणार्थियों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. गृह मंत्रालय (MHA) की एक टीम ने हाल ही में जम्मू की रोहिंग्या बस्तियों का दौरा किया था और वहां हो रहे "डेमोग्राफिक चेंज" यानी जनसांख्यिकीय बदलाव का जायजा लिया था. इस दौरे के बाद प्रशासन हरकत में आया और अवैध झुग्गी बस्तियों को खाली कराने का अभियान शुरू कर दिया. जिन प्लॉट मालिकों की जमीन पर ये अवैध बस्तियां बसी थीं, उन्हें पहले ही नोटिस भेजे गए थे कि वे अपनी जमीन खाली कराएं. इसके बाद रोहिंग्या लोगों ने खुद अपनी दुकानें और झुग्गियां हटानी शुरू कर दीं.
दरअसल, यह कार्रवाई उस माहौल में हुई है जब जम्मू में कई संगठन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जम्मू कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को तुरंत बाहर निकाला जाए.
डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि जम्मू कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे सभी बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को निकाला जाए. प्रदर्शन में "बांग्लादेशी वापस जाओ" जैसे नारे भी लगाए गए.
यह भी पढ़ें: 500 रोहिंग्या समंदर में डूबे... बंगाल की खाड़ी में दो हादसों पर सनसनीखेज खुलासा
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को जिंदा जलाया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी मुसलमान अवैध रूप से जम्मू कश्मीर में घुस चुके हैं. उनका यह भी कहना है कि इनमें से कई लोगों ने आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज भी बनवा लिए हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के मामले वर्षों से सामने आते रहे हैं, और हाल में इनमें बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे मानवाधिकार संगठनों और पड़ोसी देशों की चिंता भी बढ़ी है.
सुनील जी भट्ट