मुंह में फंसा था टिन का डिब्बा, 4 दिन से तड़प रहा था हिमालयन भालू... सेना ने रेस्क्यू कर बचाई जान, Video

जम्मू-कश्मीर की गुरेज घाटी में भारतीय सेना और वन विभाग ने एक हिमालयन भालू की जान बचाई. एलओसी के पास खापुरी गांव में भालू के मुंह पर टिन का कंटेनर फंस गया था. वह करीब चार दिन से इसी हालत में भटक रहा था. सूचना मिलने के बाद जवानों ने मुश्किल पहाड़ी इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया और भालू को खोजकर उसके मुंह से कंटेनर निकाल दिया.

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भालू के मुंह में फंस गया था डिब्बा. (Photo: Screengrab) भालू के मुंह में फंस गया था डिब्बा. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • गुरेज,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:59 PM IST

सोचिए, मुंह पर कोई डिब्बा फंस जाए और कोई उसे निकाल भी न पाए. ऊपर से चार दिन तक उसी हालत में रहना पड़े. जम्मू-कश्मीर के गुरेज से एक हिमालयन भालू की ऐसी ही तस्वीर सामने आई. उसके मुंह पर टिन का कंटेनर फंस गया था. वो कई दिनों से इसी हालत में भटक रहा था. फिर भारतीय सेना और वन विभाग की टीम ने उसे ढूंढ निकाला और रेस्क्यू कर उसकी जान बचा ली.

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मामला बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी का है. यहां एलओसी के पास खापुरी गांव में एक हिमालयन भालू को लोगों ने देखा. भालू के मुंह पर टिन का एक कंटेनर बुरी तरह फंसा हुआ था. वो उसे निकाल नहीं पा रहा था. बताया गया कि करीब चार दिन से वो इसी हालत में था. भालू की हालत देखकर इसकी जानकारी भारतीय सेना और वन विभाग तक पहुंची. इसके बाद दोनों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.

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इलाका आसान नहीं था. गुरेज घाटी का ये हिस्सा पहाड़ी और दुर्गम है. लेकिन टीम ने तलाश शुरू कर दी. जवान और वन विभाग के कर्मचारी लगातार इलाके में भालू को खोजते रहे. काफी मशक्कत के बाद भालू आखिरकार मिल गया. इसके बाद सबसे मुश्किल काम था उसके मुंह में फंसे टिन के कंटेनर को सुरक्षित तरीके से निकालना. टीम ने सावधानी से कंटेनर हटाया और भालू को राहत मिली.

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रेस्क्यू के बाद भालू को वन विभाग को सौंप दिया गया. उसे नजदीकी वन्यजीव पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया. वहां उसका मेडिकल चेकअप हुआ और फिलहाल उसे निगरानी में रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, भालू के पूरी तरह ठीक होने का इंतजार किया जाएगा. जब पशु चिकित्सक उसे फिट घोषित करेंगे, तब उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा.

ये सिर्फ एक भालू के रेस्क्यू की कहानी नहीं है. हिमालय का ये इलाका कई दुर्लभ और संवेदनशील वन्यजीवों का घर है. ऐसे में किसी जंगली जानवर की जान बचाना पूरे इकोसिस्टम को बचाने की कोशिश का हिस्सा है. और इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सेना और वन विभाग की टीम साथ रही. पहाड़ों के मुश्किल इलाके में तलाश, फिर भालू को सुरक्षित पकड़ना और उसके मुंह से कंटेनर निकालना- पूरी प्रक्रिया आसान नहीं थी. फिलहाल भालू डॉक्टरों की निगरानी में है. ठीक होने के बाद उसे फिर उसी जंगल में छोड़ दिया जाएगा, जहां से वो आया था.

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(रिपोर्ट: सज्जाद सूफी)

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