भूस्खलन, बारिश और मौसम का अलर्ट... अमरनाथ यात्रा रोकी गई, केदारनाथ-कैलाश यात्रा भी प्रभावित

बारिश और खराब मौसम ने उत्तर भारत की बड़ी तीर्थ यात्राओं की रफ्तार थाम दी है. जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए 19 जुलाई से अमरनाथ यात्रा अस्थायी तौर पर रोक दी गई है, जबकि उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण केदारनाथ और कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. कहीं भूस्खलन से रास्ते बंद हैं, तो कहीं श्रद्धालुओं को बेस कैंप पर ही रोक दिया गया है.

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अस्थायी तौर पर रोक दी गई है अमरनाथ यात्रा. (Photo: Screengrab) अस्थायी तौर पर रोक दी गई है अमरनाथ यात्रा. (Photo: Screengrab)

अशरफ वानी

  • जम्मू/देहरादून,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:10 AM IST

अगर आप 19 जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर निकलने वाले थे, तो यह खबर आपके लिए है. खराब मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा को फिलहाल रोक दिया है. पहलगाम और बालटाल, दोनों रास्तों से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी. जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप में श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है. खराब मौसम ने इस बार अमरनाथ यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है.

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प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 से यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है. यह रोक यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल पर लागू रहेगी. प्रशासन के मुताबिक, मौसम विभाग ने अगले कुछ समय के लिए खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन जैसी स्थितियों की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम उठाने की बजाय यात्रा को फिलहाल रोकना जरूरी समझा गया.

यह भी पढ़ें: अमरनाथ यात्रा में भारी भीड़... बिना रजिस्ट्रेशन उमड़े श्रद्धालु, प्रशासन को जारी करनी पड़ी एडवाइजरी

इस फैसले के बाद जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उन्हें बेस कैंप में ही रुकने और प्रशासन के अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा गया है.

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हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं. लेकिन ऊंचाई वाले इस इलाके में मौसम कुछ ही घंटों में बदल जाता है. ऐसे में प्रशासन समय-समय पर मौसम और रास्तों की स्थिति की समीक्षा करता है. अगर हालात अनुकूल नहीं होते, तो यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है.

अधिकारियों ने कहा है कि जैसे ही मौसम साफ होगा, उसी हिसाब से फैसला लिया जाएगा. तब तक श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें. यानी फिलहाल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को थोड़ा इंतजार करना होगा. मौसम की मार थमेगी, रास्ते सुरक्षित होंगे, तभी यात्रा दोबारा आगे बढ़ेगी.

राजौरी में बारिश ने बिगाड़े हालात

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. तेज बारिश के चलते जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. जिला प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरत यात्रा न करने, नदियों और नालों से दूर रहने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात पर नजर रखी जा रही है.

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कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा कि अगले कुछ दिनों में खराब मौसम के पूर्वानुमान और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ यात्रा 19 जुलाई 2026 से रोकी गई है. पहलगाम और बालटाल दोनों रास्ते बंद किए गए हैं. यात्रा फिर से शुरू करने के बारे में जानकारी मौसम की स्थितियों के बाद दी जाएगी. अब तक अमरनाथ यात्रा के दौरान 3.7 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं.

उत्तराखंड में भी बारिश की वजह से यात्रा पर असर

लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड की तीर्थ यात्राओं पर भी पड़ा है. रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर शुक्रवार को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने के कारण रास्ता कुछ समय के लिए बंद हो गया था. हालांकि राहत एवं बचाव दलों ने मलबा हटाकर पैदल मार्ग फिर से खोल दिया, लेकिन सुरक्षा कारणों से घोड़ा-खच्चर और डोली सेवा फिलहाल स्थगित रखी गई है. प्रशासन लगातार मार्ग की निगरानी कर रहा है.

वहीं, पिथौरागढ़ जिले में कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन के कारण गुंजी मार्ग बंद हो गया. इसके चलते 50 श्रद्धालुओं वाले चौथे जत्थे को धारचूला बेस कैंप पर ही रोक दिया गया. प्रशासन का कहना है कि रास्ता सेफ होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाएगा.

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राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (DEOC) को 24 घंटे एक्टिव रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने और भूस्खलन संभावित मार्गों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें. भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें.

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(एजेंसी के इनपुट के साथ)

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