अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचीं टीचर बेटियां, ₹5100 भेजकर बोलीं- सारा काम अच्छे से करा देना

सोनीपत से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक बुजुर्ग की मौत नहीं, बदलते पारिवारिक रिश्तों का दर्दनाक आईना भी है. कपड़ा कारोबारी शिवचरण गुप्ता ने तीनों बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन आखिरी वक्त में वे पिता के पास नहीं पहुंचीं. अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन तक की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम को निभानी पड़ी.

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वीडियो कॉल पर पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुई बेटियां. (Photo: Screengrab) वीडियो कॉल पर पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुई बेटियां. (Photo: Screengrab)

पवन राठी

  • सोनीपत,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:23 AM IST

शिवचरण गुप्ता ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि जिन तीन बेटियों को उन्होंने हर मुश्किल झेलकर पढ़ाया-लिखाया, अपने पैरों पर खड़ा किया, वही उनकी आखिरी विदाई में साथ नहीं होंगी. जिस पिता ने उनकी हर जरूरत को अपनी जिम्मेदारी समझा, उसके अंतिम संस्कार के लिए भी बेटियों के पास वक्त नहीं था. इतना ही नहीं, उनकी अस्थियां लेने तक कोई नहीं पहुंचा. जिंदगी भर परिवार के लिए जीने वाले एक पिता की कहानी आखिरकार ऐसी तन्हाई पर आकर खत्म हुई, जिसे सुनकर दिल भारी हो जाता है.

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रिश्तों की सच्चाई को उजागर करने वाला ये हृदय विदारक मामला सोनीपत से सामने आया है. एक पिता ने अपनी बेटियों से मिलने की चाहत में दम तोड़ दिया, लेकिन बेटियों के पास पिता के अंतिम दर्शन के लिए भी समय नहीं था. वृद्ध आश्रम में रह रहे एक कपड़ा व्यापारी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में कोई अपना नहीं पहुंचा.

जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के रहने वाले शिवचरण अपने वक्त के बड़े कपड़ा व्यापारी थे. करीब डेढ़ साल पहले वो अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत वृद्ध आश्रम में आए थे.

उनका कोई बेटा नहीं था, उन्होंने अपनी तीन बेटियों को पढ़ा-लिखाकर कामयाब बनाया. जिनमें से दो को उन्होंने अध्यापिका बनाया। उनकी पत्नी मीना गुप्ता का पहले ही निधन हो चुका था.

वृद्ध आश्रम के संचालक आनंद ने 20 दिन पहले शिवचरण रतन गुप्ता की बीमारी की सूचना उनकी बेटियों (अनिता, निशा और प्रिया) को दी थी. लेकिन तीनों बेटियों ने कथित बहाने बनाए और शिवचरण गुप्ता के पास नहीं पहुंचीं.

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वृद्ध आश्रम संचालक आनंद ने बताया कि बेटियों से बात करने के लिए शिवचरण गुप्ता एक फोन रखते थे. लेकिन बीमार होने के बाद उनकी बेटियों के फोन आने बंद हो गए थे और जब हमने इसकी सूचना दी तब भी वह नहीं पहुंचीं. आनंद बोले, 'देर रात मृत्यु होने के बाद भी हमने कहा कि अगर आप आ रहे हैं तो हम शव को सुरक्षित रखवा देते हैं, लेकिन उन्होंने समय न होने का बहाना बनाया.

शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहती है और वहीं पर टीचर हैं. अनीता से छोटी बेटी निशा यूपी आजमगढ़ में रहती है और सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में ही रहती है. तीनों बेटियों में से कोई अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई.

बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार देखा. टीचर बेटी अनिता ने ऑनलाइन 5100 रुपये भेजकर कहा कि पिता का सही ढंग से अंतिम संस्कार कर दिया जाए. पहले बेटियों ने कहा था कि अस्थियां रख देना, लेकिन बाद में कहा कि उनके पास समय नहीं है, इसलिए वृद्ध आश्रम संचालक ही गंगा में अस्थियां प्रवाहित कर दें. अंतिम संस्कार के बाद वीडियो कॉल पर ही बेटियों ने कहा कि अंतिम संस्कार की सभी वीडियो उनके पास भेज दी जाएं.

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