गुरुग्राम में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. यहां पत्नी के शोरूम में जब अंधेरा छा गया और बिजली चली गई तो पतिदेव का दिमाग चकरा गया. जिसके बाद वह खुद को हिमाचल प्रदेश पुलिस का एसपी चंदन सिंह बताकर गुरुग्राम पुलिस पर रौब झाड़ने लगा. साथ ही उसने थानेदार को बिजली आपूर्ति बहाल करवाने का आदेश भी दे डाला. हालांकि गुरुग्राम पुलिस की मुस्तैदी के आगे फर्जी एसपी साहब की हेकड़ी ज्यादा देर नहीं टिक सकी और उन्हें हवालात की हवा खानी पड़ी.
यह फिल्मी ड्रामा 25 जुलाई 2026 को शुरू हुआ, जब गुरुग्राम के थाना डीएलएफ सेक्टर-29 के एसएचओ के सरकारी मोबाइल पर एक कॉल आई. फोन करने वाले ने खुद को हिमाचल प्रदेश पुलिस का एसपी चंदन सिंह बताया. उसने कड़क आवाज में आदेश दिया कि गुरुग्राम के मेगा मॉल स्थित एक शोरूम की बिजली तुरंत चालू करवाई जाए. इतना ही नहीं बात मनवाने के लिए आरोपी ने डीजीपी स्तर के बड़े अधिकारियों का हवाला देकर पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की.
अतिउत्साह से हुआ शक और पुलिस जांच में खुल गया राज
हालांकि, फर्जी अफसर की बातों में अति-उत्साह देखकर थाना प्रभारी को दाल में कुछ काला लगा. उन्होंने बिना समय गंवाए एक पुलिस टीम को तुरंत गुरुग्राम के मेगा मॉल की पड़ताल के लिए रवाना कर दिया. मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब जांच की, तो पूरा मामला पानी की तरह साफ हो गया. फोन पर एसपी बनने वाला शख्स कोई पुलिस अफसर नहीं, बल्कि करण कुमार सकूजा (उम्र 51 वर्ष) निकला, जो नेब सराय (दक्षिण दिल्ली) का रहने वाला है. पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसकी पत्नी की गुरुग्राम के मेगा मॉल में एक दुकान है. मॉल प्रबंधन ने किसी कारणवश दुकान की बिजली काट दी थी. बस पत्नी के सामने हीरो बनने और बिजली तुरंत चालू करवाने के चक्कर में आरोपी ने फर्जी एसपी बनने का दुस्साहस कर डाला.
नवीन शर्मा, एसीपी क्राइम गुरुग्राम ने बताया कि सरकारी पद और नाम का गलत इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह करने पर आरोपी करण कुमार सकूजा के खिलाफ थाना डीएलएफ सेक्टर-29 में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. गुरुग्राम पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 25 जुलाई 2026 को ही आरोपी को धर दबोचा. पुलिस का कहना है कि सरकारी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग करने और फर्जी पहचान बनाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
नीरज वशिष्ठ