राजकोट जिले के गोंडल-कोटड़ा सांगाणी रोड पर हुए एक दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली. महज 15 वर्षीय दर्शीत चौहान और 12 वर्षीय हेमेन्द्र परमार दोनों मामा-बुआ के भाई थे. दोनों भाई स्कूटर पर घर लौट रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा. राजकोट ग्रामीण पुलिस के डीवाईएसपी के जी झाला ने बातचीत में बताया कि शनिवार रात करीब 8 बजे गोंडल में कंप्यूटर क्लास पूरी करने के बाद दर्शीत अपने मामा के घर गया था.
गाड़ी से टकराई एक्टिवा और हो गई मौत
इसके बाद वह अपने छोटे भाई हेमेन्द्र के साथ एक्टिवा पर सवार होकर कोटड़ा सांगाणी के लिए निकला था. रास्ते में सामने से आ रही कार के साथ हुई भीषण टक्कर में दोनों की दर्दनाक मौत हो गई. पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया. जी झाला ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को कम उम्र में वाहन चलाने की अनुमति न दें. उनकी एक छोटी सी लापरवाही उनके बच्चों की जिंदगी छीन सकती है और इस घटना में भी कुछ ऐसा ही हुआ है.
आने वाले दिनों में पुलिस इस संबंध में विशेष ड्राइव भी चलाएगी. यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी है. 15 साल और 12 साल की उम्र… जब बच्चों का ध्यान स्कूल, खेलकूद और पढ़ाई पर होना चाहिए, तब वे सड़कों पर वाहन चलाते हुए क्यों दिखाई देते हैं? माता-पिता की एक छोटी सी लापरवाही कभी-कभी पूरे परिवार का भविष्य छीन लेती है.
यह घटना माता-पिता के लिए चेतावनी: डीवाईएसपी के जी झाला
कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं है, फिर भी कई जगहों पर बच्चे बाइक और स्कूटर चलाते नजर आते हैं. आज दर्शीत और हेमेन्द्र इस दुनिया में नहीं हैं. दो परिवारों में मातम पसरा हुआ है. एक माता-पिता ने अपना इकलौता बेटा खो दिया है, तो दूसरे परिवार ने अपने बड़े बेटे को हमेशा के लिए खो दिया है. यह घटना हर माता-पिता के लिए एक चेतावनी है. माता-पिता की एक पल की लापरवाही पूरी जिंदगी का दर्द बन सकती है. क्योंकि हादसा सिर्फ सड़क पर नहीं होता, हादसे के बाद पूरा परिवार टूट जाता है.
रौनक मजीठिया