गुजरात में करंट लगने से शेर की हुई मौत, पुलिस ने जमीन मालिक को हिरासत में लिया

गुजरात के भावनगर में एक बाड़ में करंट होने की वजह से शेर उसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई. अब पुलिस ने शेर की मौत के बाद उस खेत के मालिक को हिरासत में ले लिया है. वन विभाग और पुलिस ने जंगल क्षेत्र के आसपास के लोगों से अपील की है कि वो अपने खेत के बाड़े में करंट प्रवाहित न करें क्योंकि इससे जानवरों की मौत होती है और ये अपराध की श्रेणी में आता है.

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यह मेटा एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर है यह मेटा एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर है

aajtak.in

  • भावनगर,
  • 30 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 7:43 PM IST

गुजरात के भावनगर में बिजली युक्त बाड़ के संपर्क में आने से एक शेर की मौत हो गई जिसके बाद पुलिस ने बाड़ के मालिक को हिरासत में ले लिया है. वन विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि करंट की चपेट में आने से एक शेर की मौत हो गई.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी ने कहा कि बोर्डी गांव में एक खेत के चारों ओर बाड़ लगाई गई थी जिसमें बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था. इसी वजह से बाड़ के संपर्क में आने से शेर की मौत हो गई जिसके बाद उसके मालिक को हिरासत में लिया गया है.

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शेर का शव महुआ वन्यजीव फॉरेस्ट रेंज के कर्मचारियों को मिला था. मौत के कारण की जांच के लिए आसपास के इलाके की जांच की गई जिसमें वन विभाग ने फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) और बिजली बिजली कंपनी की सहायता ली.

अधिकारी ने कहा, 'पाया गया कि बोर्डी गांव में कल्पेशभाई नकुम के खेत से गुजरने वाली अवैध बिजली लाइन के संपर्क में आने के बाद शेर की मौत हो गई. उसे हिरासत में लिया गया और आगे की जांच जारी है.'

गुजरात में अब 674 शेर

रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों से कहा गया है कि कृषि भूमि के चारों ओर स्थापित अवैध बाड़ और कंटीले तारों में बिजली के प्रवाह के कारण जंगली जानवरों की मौत हो जाती है, 'ऐसा करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत एक गैर-जमानती अपराध है.' बता दें कि गुजरात एशियाई शेरों का एकमात्र निवास स्थान है और यहां इनकी आबादी 1990 में 284 से बढ़कर 2020 तक 674 हो गई है.

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सिर्फ गुजरात में पाए जाते हैं एशियाई शेर

इनमे से लगभग आधे शेर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर फैले जंगलों में रहते हैं. ये वन क्षेत्र नौ जिलों और 13 वन प्रशासनिक प्रभागों में फैली हुई हैं, यह करीब 30,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है. 5 फरवरी, 2024 को संसद में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से पता चला कि पिछले पांच सालों में 555 शेरों की मौत हो चुकी है.


 

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