आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा 1997 के रोहतक बम विस्फोट मामले में सबूतों के अभाव में बरी

पुलिस उसके खिलाफ लगे आरोप साबित नहीं कर पाई. टुंडा 1996 के सोनीपत विस्फोट में पहले से ही दोषी है और आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. 1997 में ओल्ड सब्जी मंडी और किला रोड लाल मस्जिद के बाहर बम धमाके हुए थे, जिसमें कई लोग घायल हुए थे.

Advertisement
आतंकी अब्दुल करीम टुंडा- फाइल फोटो आतंकी अब्दुल करीम टुंडा- फाइल फोटो

aajtak.in

  • रोहतक,
  • 17 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:48 PM IST

आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा को 1997 के रोहतक बम विस्फोट मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजकुमार यादव ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. उसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया. पुलिस उसके खिलाफ लगे आरोप साबित नहीं कर पाई. टुंडा 1996 के सोनीपत विस्फोट में पहले से ही दोषी है और आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. 1997 में ओल्ड सब्जी मंडी और किला रोड लाल मस्जिद के बाहर बम धमाके हुए थे, जिसमें कई लोग घायल हुए थे.

Advertisement

पहला धमाका शहर की सब्जी मंडी में और दूसरा धमाका किला रोड पर करीब 30 मिनट बाद हुआ. हालांकि इन धमाकों में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन कई घायल हो गए. पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के पिलखुआ गांव के रहने वाले टुंडा के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन वह देश छोड़कर भाग गया था. 2013 में दिल्ली पुलिस ने उसे नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने पर गिरफ्तार किया था.

मौजूदा समय में राजस्थान के अजमेर की एक जेल में बंद टुंडा शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रोहतक अदालत में पेश हुआ.

मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले के बाद भारत ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार से टुंडा और 19 अन्य आतंकवादियों को सौंपने के लिए कहा था. टुंडा कथित तौर पर कट्टरपंथी बन गया और 1985 में जेहादी ताकतों में शामिल हो गया. क्योंकि उसके कुछ रिश्तेदार महाराष्ट्र के भिवंडी में सांप्रदायिक दंगों में मारे गए थे. टुंडा को दाऊद इब्राहिम का करीबी माना जाता था. उसे 2013 में गिरफ्तार किया गया था. उस पर भारत भर में कई बम विस्फोटों में शामिल होने का भी संदेह था.

Advertisement

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »