प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्र प्रभार और अलग-अलग मंत्रालयों का काम संभाल रहे 12 से ज्यादा राज्यमंत्रियों के साथ बैठक की. यह बैठक प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई. बैठक तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली. इसमें मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज की जानकारी प्रधानमंत्री को दी.
मंत्रियों ने अब तक किए गए सुधारों और नई पहलों के बारे में बताया. उन्होंने अपने मंत्रालय की योजनाओं और काम की प्रगति की भी जानकारी दी. बैठक में सरकार की योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू करने पर जोर दिया गया.
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने टाइम-बाउंड डिलीवरी पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि परियोजनाओं और योजनाओं को तय समय में पूरा किया जाना चाहिए. काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए. प्योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखें. यह भी सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाओं का फायदा सही लोगों तक सीधे पहुंचे.
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सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर खास जोर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए. इसमें किसी तरह की देरी या परेशानी नहीं होनी चाहिए.
पीएम मोदी ने मंत्रियों से जनता के साथ सीधे जुड़ाव को लेकर भी जानकारी ली. उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से संवाद और मंत्रालयों की पहुंच के बारे में भी सवाल किए.
विकसित भारत 2047 के एजेंडे पर चर्चा
बैठक में विकसित भारत 2047 का लक्ष्य भी प्रमुख मुद्दा रहा. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से उनके मंत्रालय के विजन के बारे में पूछा. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए उनके मंत्रालय की क्या योजनाएं हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि मंत्रालयों का काम विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर होना चाहिए. योजनाओं और कार्यक्रमों की दिशा भी इसी लक्ष्य के अनुरूप तय की जानी चाहिए.
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सूत्रों के मुताबिक, यह इस तरह की पहली बैठक थी. इसमें कैबिनेट मंत्री या शीर्ष नौकरशाह शामिल नहीं हुए. बैठक में स्वतंत्र प्रभार और अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े राज्यमंत्री मौजूद रहे. कृषि, शिक्षा, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े राज्यमंत्रियों ने बैठक में हिस्सा लिया.
यह बैठक सभी विभागों के सचिवों और एम्पावर्ड ग्रुप्स के साथ हुई बैठकों के बाद हुई है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री आगे भी दूसरे मंत्रालयों के राज्यमंत्रियों के साथ बैठक कर सकते हैं.
बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को साफ संदेश दिया कि मंत्रालयों का काम केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए. योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए. हर काम में समय की पाबंदी, गुणवत्ता और पारदर्शिता का ध्यान रखा जाना चाहिए. साथ ही 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर मंत्रालयों को अपनी योजनाओं और कामकाज को आगे बढ़ाना चाहिए.
हिमांशु मिश्रा