दिल्ली की रामलीलाओं पर लगा कोरोना ग्रहण, इस बार नहीं होगा मंचन

लाल किले पर पिछले 60  सालों से रामलीला का मंचन कर रही नवधार्मिक रामलीला कमेटी हो या लवकुश रामलीला सभी आयोजक इस बार निराश हैं. आयोजकों का कहना है कि इतने कम समय में ना तो मंच की तैयारी हो पाएगी और ना ही इसके लिए चंदा इकट्ठा हो पाएगा. 

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दिल्ली में इस बार रामलीला का मंचन नहीं (फाइल फोटो) दिल्ली में इस बार रामलीला का मंचन नहीं (फाइल फोटो)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 1:03 AM IST
  • कोरोना के कारण रामलीलाओं पर ग्रहण
  • इतने कम समय में सभी जरूरी तैयारी करना मुश्किल
  • 31 अक्टूबर तक धार्मिक आयोजनों को मिली मंजूरी

दिल्ली में इस बार कोरोना के कारण रामलीलाओं पर ग्रहण लग गया है. धार्मिक आयोजनों को लेकर दिल्ली सरकार की मंजूरी तो मिल गई है लेकिन दिल्ली में होने वाली बड़ी-बड़ी रामलीलाओं के आयोजक इस बार मंचन नहीं कर पा रहे हैं. वजह है समय. कोरोना को लेकर आई नई गाइडलाइंस के मुताबिक 31 अक्टूबर तक धार्मिक आयोजनों को मंजूरी मिली है. रामलीला का मंचन हो या दुर्गा पंडाल सभी लगाए जा सकते हैं, लेकिन आयोजकों का कहना है कि इतने कम समय में ना तो मंच की तैयारी हो पाएगी और ना ही इसके लिए चंदा इकट्ठा हो पाएगा. 

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लाल किले पर पिछले 60  सालों से रामलीला का मंचन कर रही नवधार्मिक रामलीला कमेटी हो या लवकुश रामलीला, सभी आयोजक इस बार निराश हैं. लव कुश रामलीला के आयोजक अर्जुन कुमार की मानें तो सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की हैं, उसके मुताबिक हर इवेंट ऑर्गेनाइजर या समिति को अपने इवेंट की वीडियो रिकॉर्डिंग करवानी होगी. यह वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू से लेकर आखिर तक रोजाना करानी होगी.

इस पूरे वीडियो रिकॉर्डिंग की सॉफ्ट कॉपी भी दिखानी होगी और भारत सरकार और दिल्ली सरकार से सर्टिफिकेट लेना होगा कि जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है. नोडल ऑफिसर वीडियो रिकॉर्डिंग देखेंगे और अगर किसी भी दिशा निर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का उल्लंघन पाया गया तो वह डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और डीसीपी को रिपोर्ट भेजेंगे जिसके बाद इवेंट की इजाजत रद्द कर दी जाएगी. 

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यही हाल नवधार्मिक रामलीला कमेटी का भी है. नवधार्मिक रामलीला कमेटी के प्रचार मंत्री राहुल शर्मा के मुताबिक रामलीलाओं की तैयारी करने के लिए दो महीने पहले ग्राउंड मिल जाया करते थे और लोगों का भारी सहयोग मिलता था. स्पांसर मिलते थे. राहुल के मुताबिक रामलीला में रौनक रामलीला के साथ-साथ वहां लगने वाले फूडस्टॉल, झूले और मेलों से होती थी लेकिन सरकार ने उनकी कोई इजाजत नहीं दी है. ऐसे में रामलीला का मंचन करना असंभव होगा. 

डीडीएमए की नई गाइडलाइन के मुताबिक रामलीला और दुर्गापूजा के लिए पंडाल लग सकेंगे. हालांकि दिल्ली में त्योहार के दौरान 31 अक्टूबर तक मेला, किसी वेन्यू के अंदर या बाहर फूड स्टॉल, रैली, एग्जिबिशन या जुलूस की इजाजत नहीं होगी.  कोई भी त्योहार संबंधित इवेंट करने के लिए इलाके के DM से इजाज़त लेनी जरूरी होगी. किसी भी इवेंट की इजाजत इलाके के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और दिल्ली पुलिस के डीसीपी मिल कर देंगे. वो भी पूरी इंस्पेक्शन करने के बाद.

किसी बंद जगह में इवेंट में पूरी क्षमता के 50% ही लोग होंगे. 200 से ज़्यादा लोग नहीं हो सकते. खुली जगह में दूरी के नियम के हिसाब से अधिकतम संख्या सख्ती के साथ तय की जाएगी. इवेंट ऑर्गेनाइजर, कार्यक्रम के लिए एंट्री और एग्जिट के अलग-अलग गेट रखेंगे और किसी भी व्यक्ति को बिना मास्क के एंट्री नहीं देंगे. 

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ऐसे सभी इवेंट का डाटा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अपने पास रखेंगे और पूरी दिल्ली का डाटा डिविजनल कमिश्नर के पास रहेगा. हर जिले में जिस इवेंट की इजाजत दी जा रही है उस को दिए जाने वाले सर्टिफिकेट को इलाके के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और डीसीपी साइन करके मुख्य सचिव को भेजेंगे और दिशानिर्देशों का स्टेटस बताएंगे. 

त्योहारों के दौरान किसी भी त्योहार वाले इवेंट में कोई भी व्यक्ति खड़ा हुआ या जमीन पर बैठा हुआ नहीं होगा. केवल कुर्सी पर बैठना होगा और दूरी के नियमों का पालन करना होगा. केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को त्योहारों के लिए लोगों के जमावड़े आदि पर से रोक 31 अक्टूबर के लिए पहले ही हटा ली है. 

कोरोना संक्रमण पर रोक लगाए रखने के लिए सरकार सख्त रुख अपना रही है. इस सख्ती का ही असर है कि इस बार रामलीला के लिए मशहूर दिल्ली इनके मंचन से महरूम रह जाएगी. 

 

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