दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी है. वैनडाइक समेत सात विदेशी नागरिकों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था. कोर्ट ने एक लाख रुपये के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि की श्योरिटी पर वैनडाइक को जमानत दी है. जमानत के बाद उन्हें दिल्ली में ही रहना होगा और NIA के बुलाने पर जांच में शामिल होना होगा.
मैथ्यू वैनडाइक की ओर से मामले की जांच में देरी को आधार बनाते हुए डिफॉल्ट बेल की मांग की गई थी. दलील दी गई कि तय कानूनी अवधि में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, इसलिए उन्हें डिफॉल्ट जमानत का अधिकार है.
कोर्ट ने कहा कि मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिक भी जांच में देरी के इसी आधार पर डिफॉल्ट जमानत के हकदार हैं. हालांकि, वैनडाइक को जमानत मिलने के बावजूद मामले की कथित आतंकी गतिविधियों और म्यांमार में सशस्त्र समूहों से उनके संपर्क की जांच जारी रहेगी. यानी जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने में देरी का लाभ अन्य आरोपियों को भी मिल सकता है.
मार्च में हुई थी सात विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी
NIA ने मार्च 2026 में वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था. वैनडाइक को 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था. वहीं छह यूक्रेनी नागरिकों पेट्रो हुर्बा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफांकीव, मैक्सिम गोंचारुक और विक्टर कामिन्स्की को दिल्ली और लखनऊ के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था.
NIA के मुताबिक, यह ग्रुप म्यांमार गया था और वहां जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार चलाने और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने का आरोप है.
जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग बिना जरूरी परमिट के मिजोरम पहुंचे और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार में दाखिल हुए. म्यांमार पहुंचने के बाद कथित तौर पर उनका संपर्क वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से हुआ. NIA का आरोप है कि इन समूहों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग दी गई. एजेंसी ने यह भी दावा किया कि ट्रेनिंग के लिए यूरोप से ड्रोन मंगाए गए थे.
पहले UAPA के तहत लगा था आतंकी साजिश का आरोप
इस मामले में शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराएं भी लगाई गई थीं. इनमें आतंकवादी कृत्य करने की साजिश से जुड़ी धारा शामिल थी.
हालांकि, सितंबर की शुरुआत में दाखिल NIA की चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई गईं. एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ आप्रवासन और विदेशी अधिनियम के तहत भारत में विदेशियों के प्रवेश और उनके ठहरने से जुड़े अपराधों के आरोप लगाए. इसके बाद NIA ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि कथित आतंकी एंगल की जांच खत्म हो गई है. एजेंसी ने कहा कि अगर जांच के दौरान और सबूत सामने आते हैं तो सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है.
आतंकी एंगल की जांच अभी जारी
NIA ने अदालत को बताया था कि वह म्यांमार में आरोपियों और सशस्त्र समूहों के बीच कथित संपर्क की जांच कर रही है. एजेंसी ने यह भी कहा था कि वह इस आरोप की जांच कर रही है कि यह समूह म्यांमार में एक नागरिक विमान पर ड्रोन हमले से जुड़ा था. हालांकि, एजेंसी किस खास घटना की बात कर रही थी, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ. यानी फिलहाल वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल मिलने के बावजूद NIA की जांच जारी रहेगी. अगर जांच में कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े नए सबूत सामने आते हैं तो एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है.
अमेरिका में भी उठा था वैनडाइक की गिरफ्तारी का मामला
मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी का मामला अमेरिका में भी चर्चा में आया था. उनके परिवार ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की थी. अमेरिकी अधिकारियों ने सामान्य कांसुलर प्रक्रिया के तहत भारतीय अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया था. हालांकि, NIA का कहना है कि इस तरह की राजनयिक या कांसुलर बातचीत उसकी जांच के नतीजे को तय नहीं करेगी.
कौन है मैथ्यू वैनडाइक?
मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक है और अलग-अलग देशों में सैन्य प्रशिक्षण और सशस्त्र संघर्षों से जुड़ा रहा है. उसे पहली बार 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान व्यापक पहचान मिली थी. वह मुअम्मर गद्दाफी के शासन के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों में शामिल हुआ था. संघर्ष के दौरान उसे गद्दाफी की सेना ने पकड़ लिया था और युद्धबंदी के तौर पर रखा गया था. बाद में गद्दाफी शासन के पतन के बाद उसे रिहा कर दिया गया.
इसके बाद वैनडाइक ने दावा किया कि उन्होंने इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ भी लड़ाई में हिस्सा लिया. रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद 2022 में वह यूक्रेनी नागरिकों और सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने से भी जुड़ा. वैनडाइक सन्स ऑफ़ लिबर्टी इंटरनेशनल नाम के संगठन का संस्थापक भी है. यह संगठन खुद को सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाली संस्था के तौर पर बताता है.
संजय शर्मा