केजरीवाल सरकार, पटाखे और दिल्ली की गर्म होती आबोहवा

दिल्ली सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा है कि उसने राजधानी की आबोहवा साफ रखने के उद्देश्य से त्योहारों को छोड़ अन्य सभी मौकों पर पटाखे छोड़ने और आतिशबाजी पर पहले से ही प्रतिबंध लगा रखा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

संजय शर्मा / खुशदीप सहगल

  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 12:06 AM IST

दिवाली पर दिल्ली और एनसीआर में पटाखों के बेचने पर ‘पाबंदी के बम’ की गूंज सुनाई ही दे रही थी कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी एक ‘सुतली बम’ फोड़ दिया. दिल्ली सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा है कि उसने राजधानी की आबोहवा साफ रखने के उद्देश्य से त्योहारों को छोड़ अन्य सभी मौकों पर पटाखे छोड़ने और आतिशबाजी पर पहले से ही प्रतिबंध लगा रखा है.

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बिक्री पर पाबंदी को लेकर पटाखे वालों की त्राहिमाम पर सुप्रीम कोर्ट ने तो कह दिया कि कोई ‘क्रेकर फ्री दिवाली’ नहीं हो रही, लोगों ने तो पहले ही पटाखे खरीद रखे हैं, हमने तो पाबंदी ही देर से लगाई.

पटाखों की बिक्री पर पाबंदी को लेकर सड़कों पर विरोध जताया जा रहा है, लेकिन सदर बाजार और चांदनी चौक की गलियों में पिछले दरवाजे से पटाखों को लेकर क्या गुल खिल रहे हैं, ये अंदाज लगाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है. कहने को पुलिस निगरानी में जुटी है, लेकिन इसी सब के बीच ऐसे बोर्ड भी देखने को मिल रहे हैं- ‘आगे ना जाएं, काम चल रहा है.’

अब बात की जाए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को केजरीवाल सरकार की ओर से सौंपी गई ड्रॉफ्ट रिपोर्ट की. इस रिपोर्ट में मौसम और प्रदूषण की वजह से पहले से ही दिल्ली की खराब आबोहवा का हवाला दिया गया. साथ ही इस बात के लिए अपनी पीठ भी ठोंकी कि पहले से ही पटाखों, आतिशबाजी पर पाबंदी लगा रखी है सिर्फ त्योहारों को बख्शा.   

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मेट्रो के बढ़े किरायों को लेकर दिल्ली का सियासी पारा चढ़ा होने के बीच केजरीवाल सरकार ने ये भी बताया कि दिल्ली की क्लाइमेट वाकई बदलती जा रही है. एनजीटी को भेजी रिपोर्ट में सरकार ने कहा कि मौसम में बदलाव का नतीजा ही है कि दिल्ली में सर्दी के दिन कम हो गये हैं, गर्मी वाली रातें बढ़ रही हैं. बारिश के दिन कम हो रहे हैं लेकिन जितने दिन भी बारिश होती हैं तब आसमान से पानी ज्यादा मात्रा में बरसता है. साथ ही दिल्ली का सालाना अधिकतम तापमान भी बढ़ता जा रहा है.   

दिल्ली में क्लाईमेट चेंज का लब्बोलुआब यही है कि अब कोई दिसंबर-जनवरी में भी बांध ले तो चेहरे पर पसीना छूटने लगता है. 

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