दिल्ली के सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब शहर की PG बिल्डिंगों का भी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा. इसका मकसद यह पता लगाना है कि इन इमारतों में रहने वाले छात्र सुरक्षित हैं या नहीं. इस फैसले के साथ PG में सुरक्षा नियमों की भी समीक्षा होगी.
इसको लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में सोमवार को एक संयुक्त समीक्षा बैठक हुई. बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में बिल्डिंग सेफ्टी, छात्रों के रहने की व्यवस्था और PG नियमों पर चर्चा हुई.
दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी दिल्ली में चल रहे PG नियमों की समीक्षा करेगी. कमेटी यह भी देखेगी कि छात्रों के लिए रहने की बेहतर व्यवस्था कैसे की जा सकती है.
सरकार का फोकस सिर्फ मौजूदा PG की जांच पर नहीं है. छात्रों के लिए नए आवास की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी. इसके लिए विश्वविद्यालयों, MCD और DDA की मदद लेने पर विचार किया जाएगा.
खाली DDA मकानों के इस्तेमाल पर भी विचार
बैठक में खाली पड़े DDA के मकानों को छात्रों के लिए इस्तेमाल करने की संभावना पर भी चर्चा हुई. सरकार का मानना है कि अगर ऐसे मकानों का इस्तेमाल छात्र आवास के तौर पर किया जा सके, तो छात्रों को सुरक्षित और बेहतर रहने की जगह मिल सकती है.
कमेटी इस पूरे विकल्प की भी जांच करेगी. इसके लिए उपलब्ध मकानों और जरूरी सुविधाओं का आकलन किया जाएगा. इसके बाद आगे की व्यवस्था पर फैसला लिया जा सकता है.
दिल्ली में पहले से चल रहे PG भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा. इसमें इमारत की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था की जांच होगी. प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि छात्रों को किसी तरह का खतरा न हो. इसके अलावा PG में आग से बचाव और दूसरी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा. अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया है.
बैठक में साफ जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि सुरक्षा नियमों की निगरानी ठीक तरीके से हो. किसी लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके.
दरअसल, दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र PG और दूसरे किराए के आवास में रहते हैं. ऐसे में सरकार अब उनकी सुरक्षा को लेकर नियमों की समीक्षा कर रही है. PG भवनों के ऑडिट से खतरनाक या कमजोर इमारतों की पहचान में मदद मिल सकती है.
सरकार की कोशिश है कि छात्रों को सुरक्षित आवास मिले. साथ ही PG संचालकों की जिम्मेदारी भी तय हो. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नियमों में बदलाव और नई व्यवस्था को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा.
aajtak.in