'दिवाली सिर पर है, पर गल्ले में एक चवन्नी नहीं...', प्रदर्शनों से तंग कनॉट प्लेस के दुकानदारों का दर्द

दिल्ली में प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों के कारण कनॉट प्लेस के बाजारों में ग्राहक कम पहुंचे. इससे दुकानदारों की बिक्री घटी, रेहड़ी-पटरी वालों को परेशानी हुई और कैब चालकों की कमाई भी कम हो गई. दिवाली से पहले कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है.

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कनॉट प्लेस में दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई. (Photo: ITGD) कनॉट प्लेस में दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई. (Photo: ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:44 PM IST

दिवाली करीब है. यह दिल्ली के कनॉट प्लेस के दुकानदारों के लिए कमाई का अहम समय है, लेकिन इस बार कुछ कारोबारियों को ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है. प्रदर्शन के दौरान रास्तों पर पाबंदियों और ट्रैफिक की परेशानी के कारण लोग बाजार आने से बचते दिखे. किसी की दुकान बंद रही, किसी की बिक्री नहीं हुई, तो किसी की रोज की कमाई आधी रह गई. ऐसे में दुकानदारों को चिंता है कि अगर ग्राहक बाजार नहीं पहुंचे, तो त्योहार से पहले कारोबार कैसे चलेगा.

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यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट में बदलाव यानी SIR के विरोध में हुआ था. विपक्षी INDIA गठबंधन के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर रहे थे. इस दौरान भीड़, पुलिस की तैनाती और ट्रैफिक पर पाबंदियों से मध्य दिल्ली के कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई. इसका असर उन लोगों पर भी पड़ा, जिनकी कमाई बाजार में आने वाले ग्राहकों पर निर्भर है.

'पिछले तीन दिन बेहद खराब रहे'

कनॉट प्लेस के ई ब्लॉक में पिछले 15 साल से चल रही गिगल्स गिफ्ट शॉप के मालिक गौरवजीत कोचर ने बताया कि शनिवार और रविवार को दुकान बंद रखनी पड़ी. सोमवार को भी ग्राहक नहीं आए. उनके मुताबिक, लोगों को आशंका थी कि कनॉट प्लेस पहुंचने के रास्ते में जाम मिल सकता है या वे प्रदर्शन के बीच फंस सकते हैं.

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कोचर ने कहा, "पिछले तीन दिन बेहद खराब रहे, बिल्कुल बिक्री नहीं हुई." उनकी परेशानी यह है कि दुकान बंद रहने या ग्राहक नहीं आने के बावजूद खर्च नहीं रुकते. किराया, कर्मचारियों की सैलरी और बिजली का बिल देना ही पड़ता है.

दिवाली गिफ्ट शॉप के लिए साल के सबसे अहम समय में से एक है. इस दौरान लोग दोस्तों और परिवार के लिए तोहफे खरीदते हैं. कंपनियां भी गिफ्ट के ऑर्डर देती हैं. कोचर को उम्मीद है कि ग्राहक फिर बाजार लौटेंगे, लेकिन त्योहार करीब होने के कारण कारोबार के लिए समय अहम है.

 

कहीं कारोबार सामान्य, कहीं ग्राहक कम

कनॉट प्लेस के हल्दीराम आउटलेट के एक सुपरवाइजर ने बताया कि उनके यहां कारोबार में ज्यादा अंतर नहीं आया. वहीं, काके दा होटल के एक कर्मचारी ने कहा कि सोमवार को ग्राहकों की संख्या कम रही. प्रदर्शन और रास्तों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण लोग कनॉट प्लेस आने से हिचक रहे थे.

यानी प्रदर्शन का असर हर कारोबारी पर एक जैसा नहीं था. कुछ जगह काम सामान्य रहा, तो कुछ दुकानों में ग्राहक कम पहुंचे. सड़क किनारे सामान बेचने वालों की चिंता और भी अलग थी. मोबाइल कवर, स्क्रीन गार्ड, मोजे और रूमाल बेचने वाले कुछ दुकानदारों को डर था कि नगर निगम या पुलिस उनका सामान जब्त कर सकती है. हालांकि, उन्होंने सामान जब्त होने की कोई घटना नहीं बताई. उनकी चिंता थी कि अगर उन्हें सामान हटाना पड़ा, तो दिन की कमाई पर असर पड़ेगा.

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मिठाई नहीं बिकी, बच गया सामान

स्टेट्समैन हाउस के बाहर गुलाब जामुन, रसगुल्ला और हलवा बेचने वाले एक दुकानदार ने बताया कि सोमवार को उसका काफी सामान नहीं बिक सका. सामान्य दिनों में उसकी मिठाइयां बिक जाती हैं, लेकिन उस दिन ग्राहक कम आए. इस कारोबार में बचा हुआ सामान अगले दिन तक ताजा नहीं रह पाता. ऐसे में कम बिक्री का मतलब सिर्फ उस दिन कम कमाई नहीं, बल्कि सामान खराब होने का खतरा भी है. दुकानदार से जब पूछा गया कि प्रदर्शन सही है या गलत, तो उसने कहा कि सही हो या गलत, यह कारोबार के लिए अच्छा नहीं है. उसकी चिंता इस बात को लेकर थी कि ग्राहक आएंगे या नहीं और दिन की कमाई हो पाएगी या नहीं.

कैब ड्राइवरों की कमाई भी घटी

प्रदर्शन और रास्तों पर पाबंदियों का असर दुकानों तक सीमित नहीं रहा. कैब ड्राइवर सुधीश कुमार यादव ने बताया कि पहले उन्हें हर 10 से 15 मिनट में एक सवारी मिल जाती थी. अब कई बार एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ता है. यादव के मुताबिक, सामान्य दिनों में उनकी रोज की कमाई करीब 1,000 रुपये तक हो जाती थी. रास्तों पर पाबंदियों के कारण यह घटकर 400 से 500 रुपये रह गई. उनके लिए परेशानी यह है कि इंतजार में समय निकल जाता है, लेकिन कमाई नहीं हो पाती.

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कनॉट प्लेस में कारोबारियों की परेशानी अलग-अलग थी. किसी की मिठाई नहीं बिकी, किसी की गिफ्ट शॉप में तीन दिन बिक्री नहीं हुई, तो किसी कैब ड्राइवर की कमाई आधी रह गई. प्रदर्शन के मुद्दे पर उनकी राय चाहे जो हो, उनके लिए रोजी-रोटी का सवाल सबसे अहम था. दिवाली से पहले उन्हें उम्मीद है कि बाजार में ग्राहक लौटेंगे और कारोबार फिर रफ्तार पकड़ेगा.

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