दिल्ली में बढ़ते संगठित अपराध और जेलों के भीतर से संचालित होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. राजधानी की जेलों में बंद विचाराधीन गैंगस्टरों, संगठित अपराधियों और हाई-रिस्क कैदियों को जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर किया जा सकेगा.
दिल्ली सरकार इसके लिए 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब एमेडमेंट) एक्ट, 2025' को दिल्ली में लागू करने का प्रस्ताव लेकर आई है. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से जेलों की सुरक्षा मजबूत होगी, गैंगवार पर अंकुश लगेगा और जेल के भीतर से संचालित होने वाले संगठित अपराध के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इस पहल का मकसद जेल सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए हाई-रिस्क कैदियों के इंटरस्टेट ट्रांसफर को मुमकिन बनाना है. साथ ही, संगठित अपराध से निपटने के लिए कई राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करना भी इसका असल मकसद है.
क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?
दिल्ली की जेलों में बड़ी संख्या में ऐसे कुख्यात अपराधी बंद हैं, जो अभी दोषी साबित नहीं हुए हैं और उनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं. मौजूदा कानूनी व्यवस्था में दोषी कैदियों को एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में भेजने का प्रावधान है, लेकिन विचाराधीन कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण को लेकर प्रभावी व्यवस्था नहीं है.
सरकार के मुताबिक, इसी कानूनी कमी का फायदा उठाकर कुछ हाई-रिस्क विचाराधीन कैदी जेल के अंदर रहते हुए भी अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय रखते हैं. मई 2026 में दिल्ली में 26 चिन्हित गिरोहों के 188 सदस्यों की पहचान की गई थी, जिनमें से 107 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया गया था.
सरकार का मानना है कि ऐसे अपराधियों के जेल में एक जगह लंबे समय तक रहने से गैंग प्रतिद्वंद्विता, धमकी, रंगदारी, लक्षित हत्या और आपराधिक साजिश जैसी गतिविधियों का खतरा बना रहता है.
जेल के अंदर से गैंग नेटवर्क चलाने पर रोक
दिल्ली सरकार के प्रस्ताव के पीछे एक बड़ी चिंता ये भी है कि कुछ गैंगस्टर जेल में बंद होने के बावजूद अपने स्थानीय नेटवर्क और दूसरे गिरोहों से संपर्क बनाए रखते हैं. ऐसे कैदियों पर आरोप है कि वो जेल के भीतर से अपने सहयोगियों तक संदेश पहुंचाने, आपराधिक गतिविधियों को प्रभावित करने और अपने गैंग के प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं.
सरकार का मानना है कि ऐसे हाई-रिस्क कैदियों को दिल्ली से बाहर की जेलों में ट्रांसफर करने से उनके स्थानीय आपराधिक नेटवर्क से संपर्क कमजोर किया जा सकता है. इससे गैंगवार, बदले की कार्रवाई, गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे की प्रक्रिया में बाधा डालने की संभावनाएं भी कम हो सकती हैं.
कैसे होगा दूसरे राज्य में ट्रांसफर?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी विचाराधीन गैंगस्टर या हाई-रिस्क कैदी को दूसरे राज्य की जेल में भेजने का फैसला संबंधित राज्यों की आपसी सहमति या गृह मंत्रालय की स्वीकृति के आधार पर किया जा सकेगा. यानी हर विचाराधीन कैदी को मनमाने तरीके से दूसरे राज्य में नहीं भेजा जाएगा.
हाई-रिस्क कैदियों की स्थिति, सुरक्षा संबंधी जरूरत, कानून-व्यवस्था और जनहित जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा. जहां जरूरी होगा, न्यायिक कार्यवाही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के मुताबिक की जाएगी.
मौजूदा कानून में क्या दिक्कत है?
फिलहाल ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1950 के तहत कैदियों के ट्रांसफर की व्यवस्था मुख्य रूप से दोषी साबित हो चुके कैदियों के लिए है. वहीं विचाराधीन कैदी संबंधित ट्रायल कोर्ट के रिमांड वारंट के आधार पर जेल में रहते हैं. उनके ट्रांसफर से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था राज्य की सीमाओं के भीतर ट्रांसफर तक सीमित है.
यही वजह है कि अगर दिल्ली की जेल में बंद कोई कुख्यात विचाराधीन गैंगस्टर जेल सुरक्षा या कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, तो उसे दूसरे राज्य की जेल में भेजने के लिए स्पष्ट कानूनी तंत्र की कमी महसूस होती है.
पंजाब मॉडल को दिल्ली में लागू करने की तैयारी
इसी कमी को दूर करने के लिए पंजाब सरकार ने 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब एमेडमेंट) एक्ट, 2025' में संशोधन किया था. इस संशोधन को 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी.
संशोधित व्यवस्था में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या जनहित को ध्यान में रखते हुए विचाराधीन कैदियों को भी एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया है.
अब दिल्ली सरकार इसी व्यवस्था को राजधानी में लागू करने की तैयारी कर रही है
मॉडल जेल कानून में भी है प्रावधान
केंद्र के 'मॉडल प्रिजन एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023' में भी कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण का प्रावधान मौजूद है. इसके तहत राज्यों की आपसी सहमति से कुछ परिस्थितियों में कैदी को दूसरे राज्य की जेल में ट्रांसफर किया जा सकता है. मॉडल कानून में विचाराधीन कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण का भी प्रावधान है और इसके लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट की सहमति का प्रावधान बताया गया है.
यह भी पढ़ें: दिल्ली: बुजुर्ग महिला हत्याकांड में बड़ा सुराग! हिरासत में होटल में रुककर लैविश लाइफ जीने वाला संदिग्ध
सरकार का दावा- सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों मजबूत होंगे
दिल्ली सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद राजधानी की जेलों में मौजूद हाई-रिस्क कैदियों का बेहतर प्रबंधन मुमकिन होगा. सरकार के मुताबिक, इसके तीन बड़े फायदे होंगे.
पहला, जेल में गैंगवार और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. दूसरा, गैंगस्टरों के स्थानीय नेटवर्क और आपराधिक गठजोड़ को कमजोर किया जा सकेगा. तीसरा, जेल प्रशासन, कानून-व्यवस्था और संगठित अपराध के खिलाफ राज्यों के बीच तालमेल मजबूत होगा.
सुशांत मेहरा