दिल्ली में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियों के बीच लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल को मिले धमकी भरे ईमेल की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक, स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी देने वाली कोई बाहरी शख्स नहीं, बल्कि उसी स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा है. उसने स्कूल में छुट्टी कराने के इरादे से बम रखे होने का फर्जी ईमेल भेजा था. साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच और डिजिटल सबूतों के आधार पर ईमेल भेजने वाली छात्रा का पता लगाया.
पुलिस के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को एयरफोर्स बाल भारती स्कूल (लोदी रोड) को एक धमकी भरा ईमेल मिला था. ईमेल का विषय था, “Bombs Placed in Your Building”, यानी इमारत में बम रखे होने का दावा किया गया था. दिल्ली के स्कूलों को लगातार मिल रही ऐसी धमकियों को देखते हुए पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया.
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इसके बाद साउथ डिस्ट्रिक्ट के साइबर थाने की टीम ने ईमेल भेजने वाले की पहचान के लिए विस्तृत तकनीकी जांच शुरू की. पुलिस ने डिजिटल सबूतों और ईमेल से जुड़े तकनीकी सुरागों का विश्लेषण किया. जांच के दौरान ईमेल भेजने वाले की पहचान और उससे जुड़े डिजिटल लिंक का पता लगाया गया.
स्कूल में छुट्टी कराने के लिए भेजा था फर्जी ईमेल
पुलिस की जांच में सामने आया कि धमकी भरा ईमेल भेजने वाली छात्रा उसी एयरफोर्स बाल भारती स्कूल में पढ़ती है. पुलिस ने उसे नाबालिग बताया है और आधिकारिक जानकारी में उसकी पहचान CCL 'V' के रूप में दी गई है. CCL का मतलब कानून के उल्लंघन के आरोपी बच्चे से है.
जांच के मुताबिक, छात्रा का मकसद स्कूल में छुट्टी करवाना था. इसी वजह से उसने इमारत में बम रखे होने की झूठी धमकी वाला ईमेल भेजा. शुरुआती तौर पर मामला स्कूल को निशाना बनाकर भेजे गए धमकी भरे संदेश का था, लेकिन तकनीकी जांच में इसके पीछे उसी संस्थान की छात्रा की भूमिका सामने आई.
पुलिस ने बताया कि मौके पर किए गए तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल सबूतों की जांच से ईमेल के स्रोत का पता लगाने में मदद मिली. इसके साथ ही संबंधित डिजिटल कड़ियों की भी पड़ताल की गई, जिससे पुलिस छात्रा तक पहुंच सकी.
नाबालिग होने के कारण जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कार्रवाई
पुलिस ने छात्रा के नाबालिग होने के कारण उसके खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के लागू प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की है. मामले में आगे की प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी की जा रही है.
दिल्ली में स्कूलों को लगातार मिल रही बम की धमकियों के बीच इस मामले का खुलासा साइबर पुलिस की तकनीकी जांच के बाद हुआ है. पुलिस ने ईमेल के डिजिटल निशानों का विश्लेषण कर उसे भेजने वाले की पहचान की. अधिकारियों के मुताबिक, मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है.
पुलिस ने इस कार्रवाई को डिजिटल जांच और तकनीकी विश्लेषण के जरिए धमकी भरे ईमेल का स्रोत तलाशने का उदाहरण बताया है. हालांकि, इस मामले में छात्रा की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि वह नाबालिग है.
अरविंद ओझा