‘इतने कम समय में राजनीति के शिखर पर पहुंच गया चिराग’, LJP नेता ने जारी की रामविलास की लिखी चिट्ठी

पशुपति पारस के साथ अन्य सभी सांसदों ने मिलकर लोक जनशक्ति पार्टी पर कब्जा कर लिया है, वहीं चिराग पासवान अब अकेले हो गए हैं और वर्चस्व की जंग लड़ रहे हैं. इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी के युवा नेता और चिराग पासवान के दोस्त सौरभ पांडेय ने एक चिट्ठी जारी की है. 

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लोजपा नेता चिराग पासवान (PTI) लोजपा नेता चिराग पासवान (PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2021,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST
  • बिहार की लोजपा में अभी भी जारी है जंग
  • सौरभ पांडेय ने रामविलास पासवान की चिट्ठी जारी की

बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी के भीतर मचा सियासी संग्राम अभी तक खत्म नहीं हुआ है. पशुपति पारस के साथ अन्य सभी सांसदों ने मिलकर पार्टी पर कब्जा कर लिया है, वहीं चिराग पासवान अब अकेले हो गए हैं और वर्चस्व की जंग लड़ रहे हैं. इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी के युवा नेता और चिराग पासवान के दोस्त सौरभ पांडेय ने एक चिट्ठी जारी की है. 

सौरभ पांडेय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लेटर जारी किया है, उन्होंने लिखा है कि ये रामविलास पासवान द्वारा लिखा गई चिट्ठी है, जो उन्होंने 1 जनवरी 2020 को लिखी थी. चिट्ठी में राजनीतिक हालात पर चिंतन और चिराग पासवान की मेहनत की तारीफ की गई थी और दोनों को आगे बढ़कर पार्टी के लिए काम करने के लिए कहा गया था. 

सौरभ पांडेय ने रामविलास पासवान द्वारा लिखी जो चिट्ठी जारी की है, उसमें लिखा है, ‘तुम लोगों के सहयोग से चिराग सांसद, राष्ट्रीय अध्यक्ष और सदन में नेता है. देश के बड़े लोगों में चिराग का स्थान है, 2013 में चिराग राजनीति में आया और कम वक्त में शिखर पर पहुंच गया.’

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आगे चिट्ठी में लिखा गया है, ‘तुम दोनों ने पिछले कुछ सालों में काफी मेहनत की है, उसी का ये परिणाम है. लेकिन, सौरभ मंजिल अभी दूर है, दो लक्ष्य हैं पहला बिहार और फिर देश.’’

सौरभ पांडेय ने ये लेटर जारी करते हुए अपने ट्वीट में लिखा, ‘जिसने मेहनत देखी है अब वो हैं नहीं , जिसने पार्टी को आगे बढ़ाने की ज़िद्द देखी है अब वो हैं नहीं. आइए हम सब चिराग के नेतृत्व में चलें. आपको बता दें कि सौरभ पांडेय चिराग पासवान के करीबी दोस्त हैं और पार्टी की रणनीति में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. 

हाल ही में लोजपा में जो लगातार हुआ है, उससे चिराग पासवान बैकफुट पर हैं. चिराग पासवान खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष बता रहे हैं, जबकि पशुपति पारस खुद को अध्यक्ष और सदन का नेता घोषित कर चुके हैं. ऐसे में पार्टी में जारी ये जंग कहां तक पहुंचेगी, उसपर हर किसी की नज़रें टिकी हैं. 

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