'दोनों किडनी चोरी, बुरे समय में पति भी भाग गया... मेरे बच्चों का क्या होगा?', बिहार की इस महिला की कहानी झकझोर देगी

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसमें पहले तो एक गरीब महिला की दोनों किडनी निकाल ली गई और अब पति भी उन्हें छोड़कर फरार हो गया है. महिला का कहना है कि वह अपनी मौत के दिन गिन रही है. लेकिन उसे अपने 3 बच्चों की चिंता है, जो उसके साथ हैं.

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बिहार के मुजफ्फरपुर में रहने वाली सुनीता की दोनों किडनी नर्सिंग होम ने निकाल ली. बिहार के मुजफ्फरपुर में रहने वाली सुनीता की दोनों किडनी नर्सिंग होम ने निकाल ली.

मणिभूषण शर्मा

  • मुजफ्फरपुर,
  • 30 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

भरोसे पर जिस नर्सिंग होम में इलाज कराया, वहां दोनों किडनी चोरी कर ली गईं. जिस पति ने सुख-दुख में साथ रहने का वादा किया वह बीच मंझधार में छोड़कर चला गया. तीन बच्चे हैं. पति उन्हें मेरे पास छोड़ गया. मजदूरी करके इन्हें पाल रही थी. अब अस्पताल में भर्ती हूं. मौत के दिन गिन रही हूं. पता नहीं कितने दिन की जिंदगी बची है. लेकिन मेरी गलती क्या थी, मेरे बाद इन बच्चों का क्या होगा, ये कैसे जिंदा रहेंगे?

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बिहार के मुजफ्फरपुर के अस्पताल में भर्ती सुनीता ये चुभते हुए सवाल पूछते-पूछते रो पड़ती हैं. यूटरस में इंफेक्शन होने पर सुनीता एक नर्सिंग होम में इलाज कराने गई थीं. वहां डॉक्टर ने उनकी दोनों किडनी निकाल लीं और फरार हो गया. अब सुनीता का इलाज मुजफ्फरपुर के SK मेडिकल कॉलेज (SKMCH) में चल रहा है. हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है. हर दो दिन में उनका डायलिसिस करना पड़ता है. कई लोग किडनी देने आगे आए, लेकिन मैच न होने के चलते ट्रांसप्लांट नहीं हो सका है.

मेरे बाद इन बच्चों का क्या होगा?

सुनीता के तीन बच्चे भी मासूम निगाहों से अपनी मां की हालत देखते रहते हैं. जब कोई सुनीता को देखने आता है तो वह उनसे यही सवाल पूछती है कि इन मासूमों का क्या कसूर है, मेरे बाद इनका क्या होगा? कुछ दिनों पहले तक सुनीता का पति अकलू राम भी उसके साथ था. वह किडनी देने के लिए भी तैयार था, लेकिन उसकी किडनी भी मैच नहीं हुई. किसी बात को लेकर अकलू राम की सुनीता से लड़ाई हो गई और वो तीनों बच्चों को उसके पास छोड़कर रफूचक्कर हो गया. जाते-जाते उसकी कही बात सुनीता के जख्मों को और हरा कर गई.

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...तुमसे मेरी जिंदगी नहीं चल पाएगी

अकलू राम ने जाते समय सुनीता से कहा कि अब तुमसे मेरी जिंदगी नहीं चल पाएगी, इसलिए मैं जा रहा हूं. पति से हुई लड़ाई का जिक्र करते समय सुनीता फफक-फफक कर रोने लगती है. वह कहती है कि जब अच्छी हालत में थी तो खुद भी मजदूरी करती थी. बच्चों को कोई कमी न आए इसका पूरा खयाल रखती थी. पति के आखिरी शब्द याद करते हुए वह कहती है, 'जाते समय उन्होंने कहा था- तुम्हारे साथ जिंदगी चलाना अब मुश्किल है. तुम जियो या मरो मुझे इससे कोई मतलब नहीं है.' सुनीत को इस बात का भी डर है कि पति उसे छोड़कर अब दूसरी शादी कर लेगा. 

मैच नहीं हुई किसी डोनर की किडनी 

अस्पताल में सुनीता की मां उनकी देखरेख कर रही हैं. मां का कहना है कि पति-पत्नी के बीच क्या विवाद हुआ, इस पर वो कुछ नहीं बोलेंगी. उन्होंने बताया कि एक महीने पहले तक अकलू राम सुनीता को राजी-खुशी किडनी देने के लिए तैयार था. लेकिन मैच नहीं होने के कारण संभव नहीं हो पाया. अस्पताल प्रबंधन भी सुनीता की मदद के लिए कोशिशें कर रहा है, लेकिन अब तक जो भी डोनर मिले हैं, किसी की भी किडनी मैच नहीं हो पाई. 

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सुनीता की ये हालत कैसे हुई?

मुजफ्फरपुर के बरियारपुर चौक के निकट निजी शुभकान्त क्लिनिक में 3 सितंबर को सुनीता देवी के यूटरस के ऑपरेशन के बजाय फर्जी डॉक्टरों ने उसकी दोनों किडनी निकाल ली थीं. जब महिला की स्थिति बिगड़ी तब डॉक्टर और क्लिनिक संचालक पवन उसे पटना के नर्सिंग होम में भर्ती कराकर फरार हो गया. आरोप है कि डॉक्टरों ने धोखे से इस घटना को अंजाम दिया. पुलिस पवन को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है.

 

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