ISRO से इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स तक, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय का 66वां AMI सम्मेलन बना रिसर्च और इनोवेशन का केंद्र

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सम्मेलन ने देश के युवा वैज्ञानिकों और रिसर्च स्कॉलर्स को अपने शोध और नए विचार पेश करने के लिए एक व्यापक मंच दिया।

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aajtak.in

  • New Delhi,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:27 PM IST
  • ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन की सहभागिता ने बढ़ाया सम्मेलन का महत्व
  • देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए रिसर्च के नए आयाम
  • इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने छात्रों को दिखाया करियर और टेक्नोलॉजी का नया रास्ता

विज्ञान, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में अकादमिक जगत और इंडस्ट्री के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी (DBUU), देहरादून में आयोजित 66वें एएमआई एनुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस एंड रिसर्च कॉन्क्लेव ने एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। माइक्रोबायोलॉजी, आधुनिक तकनीक और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च पर फोकस करते हुए देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

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सम्मेलन की थीम रही "नेक्स्ट जेन माइक्रोबायोलॉजी एजुकेशन, इनोवेशन एंड रिसर्च फॉर इकोनॉमी, एनर्जी एंड एनवायरनमेंट"। आयोजन का मकसद विज्ञान और तकनीक के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाना, रिसर्च को असल जिंदगी की चुनौतियों से जोड़ना और अकादमिक संस्थानों, इंडस्ट्री तथा रिसर्च संगठनों के बीच साझेदारी मजबूत करना था।

ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन की सहभागिता ने बढ़ाया सम्मेलन का महत्व

सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन की सहभागिता रही। उनके साथ हुई ऑनलाइन बातचीत में अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक, रिसर्च और नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण विचार सामने आए। इस सहभागिता ने सम्मेलन को सिर्फ माइक्रोबायोलॉजी तक सीमित न रखते हुए विज्ञान और उभरती तकनीकों के व्यापक परिदृश्य से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

डॉ. वी. नारायणन ने कहा, "2040 तक हमारा स्पेस प्रोग्राम दुनिया के किसी भी शीर्ष देश के बराबर होगा।" उन्होंने सैटेलाइट तकनीक, एप्लिकेशन और मजबूत ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत को एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनाने वाले कारक बताया। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी के कंधों पर देश के उज्ज्वल भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी है।

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देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए रिसर्च के नए आयाम

66वें एएमआई एनुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस एंड रिसर्च कॉन्क्लेव में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने माइक्रोबायोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। सम्मेलन में अमेरिका, भारत, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के विशेषज्ञ शामिल हुए।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर University of Tennessee, University of Texas at El Paso, Johnson & Johnson, University of Chicago, Tshwane University of Technology (South Africa), Universitätsmedizin Göttingen (Germany) और Max Planck Institute (Germany) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों की सहभागिता रही।

भारत से DRDO, BIRAC, IIT Roorkee, IIT Bombay, IIT Delhi, JNU, University of Delhi, IISER Bhopal, ICAR और CSIR जैसे प्रमुख संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक और शोधकर्ता सम्मेलन का हिस्सा रहे। इस विविध विशेषज्ञ सहभागिता ने सम्मेलन को रिसर्च और अकादमिक संवाद के लिए एक व्यापक मंच दिया।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने छात्रों को दिखाया करियर और टेक्नोलॉजी का नया रास्ता

सम्मेलन और DBUU के इंडस्ट्री-अकादमिक विजन में कॉर्पोरेट जगत से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी भी अहम रही। Microsoft के श्री अभिनव गंभीर, Google के श्री मनोज भुटानी और Google Cloud India के श्री संजय कथूरिया जैसे इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स को तकनीक, इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों और करियर की संभावनाओं से जुड़े अहम पहलुओं से रूबरू कराया। DBUU की वेबसाइट पर इन विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय के "From Corporate to Classroom" नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है।

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इसके साथ ही श्री आदर्श श्रीवास्तव सहित अन्य इंडस्ट्री विशेषज्ञों की सहभागिता ने अकादमिक ज्ञान और व्यावहारिक इंडस्ट्री एक्सपोजर के बीच की दूरी कम करने में अहम भूमिका निभाई।

AI और माइक्रोबायोलॉजी का संगम बना चर्चा का प्रमुख विषय

सम्मेलन में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आने वाले समय में माइक्रोबायोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सिर्फ पारंपरिक प्रयोगशाला-आधारित शोध पर्याप्त नहीं होगा। AI, डेटा एनालिटिक्स और कंप्यूटेशनल टूल्स का इस्तेमाल रिसर्च को ज्यादा तेज, सटीक और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञों ने AI-आधारित मूल्यांकन, डेटा लिटरेसी, फोरेंसिक एवं सिंथेटिक माइक्रोबायोलॉजी, वैक्सीन डेवलपमेंट और रोगों की भविष्यवाणी जैसे क्षेत्रों में तकनीक के बढ़ते महत्व पर चर्चा की।

युवा शोधकर्ताओं के लिए बना अहम मंच

सम्मेलन ने देश के युवा वैज्ञानिकों और रिसर्च स्कॉलर्स को अपने शोध और नए विचार पेश करने के लिए एक व्यापक मंच दिया। विशेषज्ञों ने युवा शोधकर्ताओं को ऐसे रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जो छोटे स्तर से शुरू होकर समाज और उद्योग पर बड़ा असर डाल सकें।

इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका अब सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों को रिसर्च, इनोवेशन, इंडस्ट्री कनेक्ट और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

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DBUU में बढ़ता रिसर्च और इंडस्ट्री कनेक्ट

66वें AMI सम्मेलन का DBUU में आयोजन विश्वविद्यालय के बढ़ते रिसर्च और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग को भी दर्शाता है। विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड इनोवेशन इकोसिस्टम में इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च और इंडस्ट्री कोलैबोरेशन को प्राथमिकता दी जा रही है।

देश-विदेश के वैज्ञानिकों, इंडस्ट्री विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाकर सम्मेलन ने विद्यार्थियों के लिए वैश्विक स्तर के विचारों और शोध से जुड़ने का अवसर तैयार किया। यही वजह है कि 66वां AMI सम्मेलन सिर्फ एक अकादमिक आयोजन न रहकर रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और युवा प्रतिभाओं को जोड़ने वाला अहम मंच बनकर सामने आया।

देहरादून में आयोजित इस सम्मेलन ने यह संदेश भी दिया कि भविष्य की शिक्षा वही होगी जो रिसर्च को इनोवेशन से, इनोवेशन को इंडस्ट्री से और इंडस्ट्री को समाज की असल जरूरतों से जोड़ सके। DBUU में आयोजित 66वें AMI सम्मेलन ने इसी दिशा में एक अहम कदम पेश किया।

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