पीठ, कमर या घुटनों का दर्द अब सिर्फ बड़ों या बुज़ुर्गों की समस्या नहीं रह गई है. अब स्कूल के बच्चों में भी ये समस्या देखी जा रही है.
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP)के मुताबिक, स्कूली बच्चों में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं 40 % तक बढ़ गई है. इसका मतलब ये है कि बच्चों को हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों, नसों और लिगामेंट्स से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं. इसमें कमर दर्द, गर्दन दर्द, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव जैसी दिक्कतें शामिल होती है. चिंता की बात यह है कि इन परेशानियां के होने का कारण स्कूल बैग का बोझ नहीं बल्कि दूसरी वजहें भी हैं.
वर्ल्ड फ़िज़ियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफ़िक के प्रोफेसर डॉ. संजीव के. झा ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. वह कहते हैं कि अब पीठ, घुटनों और कमर का दर्द बुढ़ापे में शुरू नहीं होता है. स्कूली बच्चों में भी ये देखा जा रहा है. हम अपनी प्रैक्टिस में बच्चों में मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी) समस्याएं काफी देख रहे हैं.
देश के चार बड़े स्कूलों के बच्चों पर हुई स्टडी
भारतीय रिसर्च से पता चलता है कि स्कूली बच्चों में मस्कुलोस्केलेटल लक्षण पहले से ही एक बड़ी चिंता का विषय हैं. देश में चार बड़े स्कूलों के 8-15 साल की उम्र के 934 बच्चों पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि 55.9% बच्चों ने पिछले 12 महीनों में दर्द महसूस किया, जबकि 41.6% ने पिछले 10 दिनों में दर्द की शिकायत की और 21.3% ने इस समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह ली थी. स्टडी में यह भी पाया गया कि बच्चों में पीठ दर्द की एकमात्र वजह स्कूल बैग का वजन नहीं था.
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स्क्रीन का इस्तेमाल बना रहा हड्डियों को कमजोर
डॉ. संजीव के. झा के मुताबिक,आज के बच्चे पढ़ाई करने और स्क्रीन का इस्तेमाल करने में घंटों बिताते हैं और एक्टिव नहीं रहते, जबकि हड्डियों और मसल्स को अच्छा रखने के लिए शरीर की मूवमेंट और अच्छी फिटनेस जरूरी है. इसके अलावा खेलकूद न करना, उठने-बैठने या चलने-फिरने की खराब आदतें, पहले लगी कोई चोट, मानसिक तनाव भी इसका कारण हो सकता है. डॉ. संजीव कहते हैं कि अब हमें मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं बच्चों में भी बहुत दिख रही है तो अब समय आ गया है कि बच्चों की फिटनेस पर ध्यान देने की जरूरत है.
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बच्चों को इस समस्या से कैसे बचाएं
डॉ. रुचि वार्ष्णेय ने बताया कि पीठ दर्द को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली एक समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. आज के समय में इसकी शुरुआत बचपन से भी होती है, और दर्द के एक स्थायी समस्या बनने से पहले ही बचाव शुरू कर देना चाहिएय आने वाली पीढ़ी की बेहतर सेहत के लिए जागरूक होना बहुत जरूरी है. इसके लिए ये कुछ काम करें.
बच्चों को हर दिन कम से कम आधा घंटा बाहर खेलन के लिए भेजें
उनको सही पोश्चर में उठने- बैठने के बारे में बताएं
बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें
उनके खानपान का ध्यान रखें.
आजतक हेल्थ डेस्क