बारिश के मौसम में बढ़ रहे टाइफाइड के मामले, डॉक्टर से जानें क्या हैं लक्षण और बचाव के तरीके

बारिश के मौसम में टाइफाइड के मामले बढ़ जाते हैं, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है. यह फीकल ओरल रूट से फैलता है और इसके लक्षणों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और सिरदर्द शामिल हैं.

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आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST

अगर आपको बुखार है और इसके साथ पेट दर्द, उल्टी और दस्त की समस्या भी हो रही है तो इसको हल्के में ना लें. यह टाइफाइड का लक्षण हो सकता है. बारिश के मौसम में इस बुखार के मामले बढ़ जाते हैं. टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है. बारिश के मौसम में पानी दूषित हो जाता है इससे इस बीमारी के फैलने की आशंका ज्यादा रहती है.

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अधिकतर मामलों में यह कुछ हफ्तों की दवाओं के कोर्स से ठीक हो जाता है, लेकिन अगर समय पर लक्षणों की पहचान और इलाज ना मिले तो यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है जो जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसे में आपके लिए यह जानना जरूरी है कि टाइफाइड कैसे फैलता है, इसके लक्षण और बचाव के तरीके क्या क्या हैं.

कैसे फैलता है टाइफाइड

इस बारे में जानने के लिए आजतक.इन ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि से बातचीत की है. डॉ सुभाष बताते हैं कि टाइफाइड का संक्रमण फीकल ओरल रूट से फैलता है. जब टाइफाइड से संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित भोजन या पानी जब कोई स्वस्थ व्यक्ति खातापीता है तो बैक्टीरिया शरीर में चले जाते हैं. जिससे टाइफाइड हो जाता है. इससे संक्रमण के बाद शरीर में कुछ लक्षण दिखने लगते हैं, जिनको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. 

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टाइफाइड के लक्षण क्या होते हैं 

बुखार

पेट में दर्द बने रहना

उल्टी 

दस्त 

सिरदर्द

ये लक्षण हो सकते हैं खतरनाक

डॉ. सुभाष बताते हैं कि कुछ मरीजों में बीमारी के दूसरे सप्ताह के बाद लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं. इसमें मेनिन्जाइटिस या एन्सेफलाइटिस से लेकर सेप्सिस और सेप्टिक शॉक हो सकता है. इससे मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो सकता है.यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है. ऐसे में टाइफाइड की शुरुआत में ही इसका इलाज कराना चाहिए. इसके लिए कुछ टेस्ट करा सकते हैं.

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कैसे होते हैं टाइफाइड के टेस्ट

डॉ सुभाष बताते हैं कि टाइफाइड की पहचान के लिए ब्लड कल्चर जांच की जाती है.कुछ मरीजों में विडाल टेस्ट भी किया जाता है, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य टेस्ट सीबीसी और ईएसआर भी कराने की सलाह दे सकते हैं. अगर टेस्ट में टाइफाइड का पता चलता है तो फिर डॉक्टर की सलाह के हिसाब से इसका इलाज कराएं और इलाज का कोर्स बीच में बिलकुल न छोड़े.

अगर इलाज बीच में छोड़ देते हैं तो यह बीमारी फिर से आ सकती है, जो खतरनाक हो सकता है. टाइफाइड का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है, जो आमतौर पर 10 दिन से 14 दिन तक चल सकता है. हमेशा ध्यान इसलिए दवा का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है.

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टाइफाइड से बचाव कैसे करें?

खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं.

पानी को उबालकर पीएं तो अच्छा है

घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से टाइफाइड वैक्सीन लगवाएं
 

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