दूसरों की ‘परफेक्ट’ जिंदगी देखकर करते हैं खुद से तुलना? यह आदत बना सकती है मानसिक रूप से बीमार

सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट जिंदगी देखकर खुद से तुलना करने की आदत बीमारियों का कारण बन रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत युवाओं में ज्यादा देखी जा रही है. इसके बारे में मानसिक रोग विशेषज्ञों ने बताया है.

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दूसरों से तुलना बना रही बीमार ( PHOTO-ITG) दूसरों से तुलना बना रही बीमार ( PHOTO-ITG)

अभिषेक पांचाल

  • नई दिल्ली ,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक और परफेक्ट लाइफ की तस्वीरें लोगों को बीमारी की ओर धकेल रही हैं .विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दूसरों की ‘परफेक्ट’ जिंदगी देखकर लोग खुद  से उसकी तुलना करते हैं. यह आदत धीरे-धीरे व्यक्ति को डिप्रेशन,एंग्जायटी का शिकार बना सकती है. मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास ऐसे कई केस भी आ रहे हैं. युवाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है. 

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विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोग अपनी जिंदगी का केवल अच्छा हिस्सा दिखाते है. भले ही वास्तविक जीवन में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन सोशल मीडिया पर वे खुद को खुश और परफेक्ट दिखाने की कोशिश करते हैं. अब लोगों में नई गाड़ी खरीदना, महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाना, घूमने जाना किसी आम सी उपलब्धि को बड़ा दिखाना आम बात हो गई है. इसका असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो किसी कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. इस कारण उनकी मानसिक सेहत खराब हो रही है. 

दूसरों से तुलना कैसे बनती है मानसिक बीमारी का कारण?

दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मानसिक रोग विभाग में प्रोफेसर डॉ. आर.पी बेनिवाल ने इस बारे में बताया है. डॉ बेनिवाल कहते हैं कि जब लोग दूसरों के जीवन की खुशी सोशल मीडिया पर देखते हैं तो उनके मन में अपनी जिंदगी को लेकर असंतोष पैदा होने लगता है. वह यह सोचने लगते हैं कि काश उनके पास भी वैसी गाड़ी होती, वैसा घर होता तो कितना अच्छा होता, काश वह भी उतनी ही शानदार जिंदगी जी रहे होते. दूसरे से यही तुलना धीरे-धीरे मानसिक तनाव का रूप लेने लगती है.

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डॉ बेनिवाल बताते हैं कि वह उनके पास आने वाले मरीजों की पूरी हिस्ट्री लेते हैं. इस दौरान कई मरीज बताते हैं कि सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखकर वह हीन भावना का शिकार होते हैं. वह दूसरे से खुद के जीवन की तुलना करते हैं.

डॉ बेनिवाल कहते हैं कि  तुलना करने की यही आदत लोगों की मानसिक समस्याओं की एक बड़ी वजह बन रही है. खासतौर पर युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसमें समस्या यह है कि जिन लोगों की जिंदगी को लोग परफेक्ट मान रहे हैं असल में उनकी जिंदगी वैसी नहीं है जैसी वह दिखाते हैं. 

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FOMO भी बढ़ा रहा है परेशानी

गाजियाबाद के जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग में डॉ ए.के विश्वकर्मा बताते हैं कि सोशल मीडिया की वजह से कई लोगों में FOMO (Fear of Missing Out) यानी पीछे छूट जाने का डर भी बढ़ रहा है.जब लोग अपने दोस्तों या परिचितों को घूमते-फिरते, पार्टी करते या नई चीजें खरीदते हुए देखते हैं तो उन्हें लगता है कि वे जिंदगी के अच्छे अनुभवों से वंचित रह गए हैं. इस भावना के कारण कई लोग अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने लगते हैं. कई बार वे सिर्फ दूसरों की तरह दिखने या वैसा जीवन जीने के लिए अनावश्यक खरीदारी करते हैं. बाद में आर्थिक दबाव और तनाव उनकी मानसिक स्थिति को और खराब कर देता है.

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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

लगातार तुलना करने की आदत 

हर समय खुद को दूसरों से कमतर समझना

उदासी और निराशा महसूस होना

चिड़चिड़ापन बढ़ना

एंग्जायटी और मानसिक तनाव रहना

सोशल मीडिया देखने के बाद मन खराब होना

इस समस्या से बचाव के लिए क्या करें?

सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीमित करें

जो है, उसमें संतुष्ट रहने की आदत विकसित करें

परिवार और दोस्तों के साथ वास्तविक समय बिताएं

तनाव बढ़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच न करें
 

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