कमर के माप से तय होगा आप मोटापे के शिकार हैं या नहीं, BMI के साथ WHR भी बनेगा पैमाना

देश में मोटापे की परिभाषा अब केवल BMI पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि कमर-से-कूल्हे अनुपात को भी इसमें शामिल किया जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर देश के सरकारी अस्पतालों में यह नई जांच प्रक्रिया शुरू होगी.

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कमर के माप से मोटापे की पहचान कमर के माप से मोटापे की पहचान

अभिषेक पांचाल

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

देश में मोटापे की परिभाषा बदलने वाली है. अगरआपकी कमर का साइज बढ़ा हुआ है तो भी आप मोटापे के शिकार माने जाएंगे. इसकी पहचान के लिए वेस्ट-टू-हिप रेशियो (WHR) यानी कमर और कूल्हे के घेरे के अनुपात की जांच की जाएगी. स्वास्थ्य मंत्रालय इस पहल को देशभर के सरकारी अस्पतालों में लागू करने की तैयारी कर रहा है. दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में यह प्रक्रिया शुरू भी हो गई है. 

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दिल्ली AIIMS के जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और चीफ सर्जन डॉ. असुरी कृष्णा ने इस बारे में आजतक. इन को बताया है. डॉ. असुरी कहते हैं कि मोटापे की पहचान के लिए अभी तक केवल BMI को मानक माना जाता है, लेकिन अब वेस्ट-टू-हिप के अनुपात की जांच को भी उतना ही महत्व देना जरूरी हो गया है. इससे मोटापे का सही पता चल सकता है. 

डॉ असुरी कहते हैं कि AIIMS में इसी दिशा में काम चल रहा है. अब मोटापे की पहचान के लिए कमर से हिप के अनुपात का भी आकलन किया जा रहा है. संस्थान में आने वाले मरीजों में इसके आधार पर मोटापे का डायग्नोज किया जा रहा है. इसका मकसद डायबिटीज, हार्ट डिजीज और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम की समय रहते पहचान करना है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन बीमारियों का एक बड़ा कारण मोटापा ही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 30 से अधिक होता है उनको मोटापे का मरीज (Obese) माना जाता है. 

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मोटापा एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें शरीर में इतना अधिक फैट जमा हो जाता है जो सेहत के लिए खतरा है. इसका मूल कारण ली गई कैलोरी और खर्च की गई कैलोरी के बीच का असंतुलन होता है. ज्यादा कैलोरी लेने से शरीर में फैट बढ़ता है. जो डायबिटीज से लेकर दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है. 

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में भी कमर के माप का महत्व बताया गया था

बीते साल प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Diabetes & Endocrinology ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें कहा गया था कि मोटापे की पहचान के लिए केवल BMI पर निर्भर रहना काफी नहीं है. डॉक्टरों को कम से कम एक और पैरामीटर को ध्यान में रखना चाहिए. लैंसेट रिपोर्ट में खासतौर पर साउथ एशिया के लोगों का जिक्र किया गया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि साउथ एशिया के लोगों में कमर के आसपास चर्बी काफी बढ़ी रहती है. जो कई बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकती है. ऐसे में मोटापे की पहचान के लिए वेस्ट-टू-हिप के अनुपात भी देखना चाहिए.

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केवल बीएमआई देखना काफी क्यों नहीं? 

इस बारे में सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने बताया है. डॉ किशोर कहते हैं कि बीएमआई केवल एक स्क्रीनिंग टूल है, जो शरीर में फैट का अनुमान लगाता है, लेकिन यह ये नहीं बताता कि चर्बी शरीर के किस हिस्से में जमा है. इसको मोटापे के मरीजों का इलाज करने के लिए एक अकेला पैमाना मानना अब ठीक नहीं है. इसका कारण यह है कि कुछ व्यक्तियों में ज्यादा मसल्स के कारण उनका बीएमआई अधिक हो सकता है, भले ही उनके शरीर में चर्बी ना हो. भारत में ऐसे भी बहुत लोग हैं जिनका बीएमआई तो नॉर्मल है, लेकिन उनके पेट के आसपास काफी चर्बी होती है. जो भविष्य में डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों का रिस्क हो सकता है.

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यही वजह है कि भारत में भी अब बीएमआई के साथ- साथ वेस्ट-टू-हिप रेशियो को भी मोटापे की पहचान के लिए एक जरूरी जांच माना जा रहा है. इसका फायदा यह होगा कि जिन लोगों का वेस्ट-टू-हिप रेशियो तय मानक से अधिक होगा उनको मोटापे की श्रेणी में रखा जाएगा और उसी हिसाब से उनका इलाज होगा. इससे समय रहते डायबिटीज और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी. 

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वेस्ट-टू-हिप रेशियो क्यों महत्वपूर्ण है? 

डॉ. किशोर कहते हैं कि वेस्ट-टू-हिप रेशियो कमर और कूल्हों के घेरे का अनुपात है, इसे निकालने के लिए कमर के माप को कूल्हे के माप से डिवाइड किया जाता है. पुरुषों में यह 0.90 और महिलाओं में 0.85 से कम होना चाहिए. अगर यह इससे ज्यादा है तो WHO के मानकों के हिसाब से ऐसा व्यक्ति मोटापे के मॉडरेट रिस्क में आ गया है. इससे कई बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है.  

कमर-हिप अनुपात (WHR) कैसे मापें?

कमर-हिप अनुपात मापने के लिए एक इंची टेप से अपनी नाभि के थोड़ा ऊपर कमर के सबसे पतले हिस्से का घेरा मापें. इसके बाद अब कूल्हों के सबसे चौड़े हिस्से के चारों ओर का घेरा मापें. अब कमर के घेरे को हिप के घेरे से भाग कर दें, जो संख्या आएगी, वही आपका रेशियो होगा. उदाहरण के तौर पर अगर किसी की कमर 30 इंच की है और हिप 33 इंच है, तो गणना होगी: 30 ÷ 33 = 0.91 यानी WHR 0.91 होगा. इस आंकड़े का मतलब है कि व्यक्ति मोटापे से पीड़ित है. 

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