बीड़ी-सिगरेट रोज नहीं, कभी-कभार पीते हैं? क्या फिर भी मुंह के कैंसर का खतरा? डॉक्टर से समझें

देश में मुंह के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो मुख्य रूप से बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी, जर्दा और तंबाकू के सेवन से होते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि कभी-कभार धूम्रपान भी खतरे से खाली नहीं है.

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स्मोकिंग स्मोकिंग

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

मुंह के कैंसर के मामले देशभर में बढ़ रहे हैं. बीड़ी- सिगरेट, गुटखा, खैनी, जर्दा और तंबाकू खाने से ये कैंसर होता है. कुछ लोगों को मानना है कि कभी- कभी जैसे धूम्रपान करने से मुंह के कैंसर का रिस्क नहीं होता है, लेकिन इस मामले में डॉक्टरों की राय कुछ अलग है. डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान कम या ज्यादा का कोई पैमाना नहीं है. 

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डॉक्टर बताते हैं कि कई लोग यह सोचकर धूम्रपान करते हैं कि कभी-कभी धूम्रपान करने से कोई नुकसान नहीं होता है,  लेकिन ऐसा नहीं है. कुछ लोग शराब और तंबाकू को एक साथ लेते हैं. जैसे सिगरेट के साथ शराब पीते हैं. इससे जोखिम और भी बढ़ सकता है. ऐसे में इससे बचना चाहिए.

सोशल स्मोकिंग’ भी खतरनाक

दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सिर और गर्दन कैंसर विभाग में डॉ. अक्षत मलिक बताते हैं कि युवाओं में ‘सोशल स्मोकिंग’ या दोस्तों के साथ कभी-कभार तंबाकू का सेवन गंभीरता से नहीं लिया जाता है. युवाओं को ये लगता है कि कभी- कभी स्मोकिंग करने से कोई खतरा नहीं है, जबकि ऐसा नहीं है. धूम्रपान का कोई कम या ज्यादा का पैमाना नहीं है. ये कम मात्रा में भी मुंह के कैंसर का कारण बन सकता है.

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डॉ. अक्षत बताते हैं कि बीते एक दशक में देश में मुंह के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र में भी लोगों को मुंह का कैंसर हो रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण धूम्रपान ही है. अब देखा जाता है कि 18 से 22 साल के युवाओं में भी धूम्रपान का चलन बढ़ा है, जो खतरनाक है.  

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इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें 

  1.  मुंह में ऐसा छाला जो दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो
  2.  मुंह में सफेद या लाल रंग का पैच
  3. मुंह खोलने या चबाने में परेशानी
  4. खाना खाते समय लगातार जलन या दर्द
  5. जीभ या मुंह के किसी हिस्से में गांठ 

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धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करें

डॉ. अक्षत कहते हैं कि कभी- कभी धूम्रपान करना भी कैंसर का कारण बन सकता है. ऐसे में ये जरूरी है कि स्मोकिंग, बीड़ी पीनी, गुटखा खाना या फिर किसी भी रूप में अगर धूम्रपान करते हैं तो इसको छोड़ने की कोशिश करें. इस मामले में डॉक्टरों से सलाह लें. दवाओं और थेरेपी की मदद से आप इसको आसानी से छोड़ सकते हैं. 

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